Wednesday, July 31, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"मेरे दिल के आँगन में तेरी यादो की इक तुलसी 
हर रोज मुझको और जिन्दा कर जाती है."

-शशिष  कुमार तिवारी 
(12.26pm, 1st Aug 2013 at Patna) 

Saturday, July 20, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"दिल के दरवाजे धक्को से नहीं खुलते
तुम मुस्कुरा दो प्यार से येही हूनर काफी है।"

-शशिष कुमार तिवारी
(1.51pm, 20th July 2013 at Patna)

Wednesday, July 17, 2013

 बस दो पंक्तियाँ---

"तेरी पलकों पे अपना आसमा बिठाने के लिए
मैं तैयार हूँ  प्रिय
तेरे क़दमों में अपनी जमीं रख जाने के लिए।"

-शशिष कुमार तिवारी
(12.55am, 17th July 2013 at Patna)

Monday, July 15, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"दिल की बातों को बताने के लिए
हमें चाहिए एक दिल अपना बनाने के लिए।"

-शशिष कुमार तिवारी
(9.22pm, 15th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---

"मेरी किस्मत में चाँद तारे न थे
वो हसीन खूबसूरत नज़ारे न थे
बड़ी मुश्किल से पहुंचे हैं यहाँ तक प्रिय
सफ़र आप जैसे आसान हमारे न थे।"

-शशिष कुमार तिवारी
(9.06pm, 15th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---

"तेरे लबो पे एक मुस्कान की खातिर
हम पागल हुए इश्क में उड़ान की खातिर।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.21pm, 15th July 2013 at Hazaribag)

बस दो पंक्तियाँ---

"कुछ तुम बढ़ो कुछ हम बढ़ें
आओ दूरियां ख़तम करें 

कुछ तुम बुनो कुछ हम बुनें
आओ ख्वाहिशें पूरी करें।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.09pm, 15th July 2013 at Hazaribag)

बस दो पंक्तियाँ---

"रोशन किया जिसको वही दीया जलाता है
दिल में बसाया जिसको वही अक्सर भुलाता है।"

-शशिष कुमार तिवारी
(5.53pm, 15th July 2013 at Hazaribag)



Sunday, July 14, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"खुदा के आँगन में खिलते हैं रिश्ते के फूल जो
अक्सर जिन्दगी के बाद भी लुटाते हैं खुशबूएं।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.35pm, 14th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---

"कितना खूब होता है पहले प्यार का एहसास, पर
ये आता नहीं दुबारा इक बार गुजर जाने के बाद।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.04pm, 14th July 2013 at Hazaribag)

बस दो पंक्तियाँ---

"एक छोटी सी मलाला ने दुनिया हिला डाला
तुम कहते हो अब भी तुम काफी नहीं अकेले।"

-शशिष कुमार तिवारी
(7.24pm, 14th July 2013 at Hazaribag)

Saturday, July 13, 2013

"और फिर येही से ..."

तुम्हारा प्रेम 
जैसे किसी छोटे पौधे की जड़ 
और मेरा ह्रदय 
जैसे नवीन नाजुक माटी 
वक्त जैसे जैसे बीतता गया 
जड़ें समाती गईं 
माटी के अन्दर 
फिर धीरे धीरे माटी ने 
जड़ों को फैलने दिया 
अपने रोम रोम में 
और फिर 
तुम बढ़ने लगे 
खिलने लगे तुममें 
सुन्दर सुन्दर पुष्प 
और तुम्हारी खुशबू 
फैलने लगी चारो तरफ 
तुम सवरते चले गए 
दिन प्रतिदिन 
होते गए और भी आकर्षक 
और फिर 
एक दिन 
जब सब लोग 
तुमसे करने लगे प्यार
तुम इतराने लगे अपने पुष्पों पर 
और भूल गए 
अपना जड़ और मेरा ह्रदय 
और येही से 
शुरू हुआ फिर 
एक और सुन्दर प्रेम का 
अंत ... दुखांत!

-शशिष कुमार तिवारी 
(2.49pm, 13th July 2013 at Patna)
 

बस दो पंक्तियाँ---

"मैं तेरी मोहब्बत का इन्द्रधनुष बनू प्रिय
तू मेरे आकाश का बादल तो बन जा!"

-शशिष कुमार तिवारी
(2.24pm, 13th July 2013 at Patna)
बस दो पंक्तियाँ---

"न पंख से न इरादों से 
इंसान उड़ा जज्बातों से।" 

-शशिष कुमार तिवारी 
(1.10pm, 13th July 2013 at Patna)

Friday, July 12, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"मेरे अपने ही लोगों ने मुझे अनजाना बना दिया 
तुझसे इश्क क्या किया बेगाना बना दिया।" 

-शशिष कुमार तिवारी 
(2.18pm, 12th July 2013 at Patna)

Tuesday, July 9, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"मुझे आँधियों का शौक है ये हवाये क्या डराएँगी
मुझे ख्वाहिशों का शौक है फ़रमाइशे क्या डराएँगी!" 

-शशिष कुमार तिवारी
(9.26pm, 9th July 2013 at Patna)

बस दो पंक्तियाँ---

"मेरी निगाहें तुझको ढूंढती हैं हर मंजर में
जबकि दिल को पता है तू है मेरे ही अन्दर में।"

-शशिष कुमार तिवारी
(2.42pm, 9th July 2013 at Patna)
बस दो पंक्तियाँ---

"जमीं को देखकर आसमां का अंदाज़ा न लगा
मेरी फटी कमीज देखकर मेरा तमाशा न बना
है कूबत तो कभी अन्दर आके देख जरा
यूं बाहर से दूर बैठे समंदर का अंदाज़ा न लगा।"

-शशिष कुमार तिवारी
(7.15am, 9th July 2013 at Patna)

Monday, July 8, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"मैं जमीं तुम धूल
भला कब तक उड़ोगे हवाओं में 
प्रिय ये न भूलो
तुम जहां भी जाओ 
तुम्हें समाना है मेरी ही बाँहों में।" 

-शशिष कुमार तिवारी 
(5.05pm, 8th July 2013 at Patna)

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"हर हाथ को इक हाथ की जरुरत है 
हर ख्वाब को इक पर की जरुरत है 
जिन्दगी यूहीं यहाँ जिन्दा नहीं रहती 
हर सांस को इक आस की जरुरत है।"

-शशिष कुमार तिवारी 
(4.38pm, 8th July 2013 at Patna)

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"तेरे जाने का इक मलाल रहा 
मेरे दिल में इक सवाल रहा 
जब भी मिलोगे पूछूँगा तुमसे 
मुझसे जुदा होकर तेरा क्या हाल रहा?" 

-शशिष कुमार तिवारी 
(आज सुबह लगभग 9 बजे)
{www.shashishkavi.blogspot.com}

Sunday, July 7, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"फिर आज घर में दीया जलाया 
दिल में जलाना भूल गए 
वो फिर पैसों की अफरा-तफरी में 
माँ को गले लगाना भूल गए।"

-शशिष कुमार तिवारी
(9.31pm, 7th July 2013 at Patna) 

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"मैं तो खुली किताब हूँ 
मुझे कुछ छुपाना नहीं आता 
दिल पे लिख लेता हूँ जिसे 
उसे भुलाना नहीं आता।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.59pm, 7th July 2013 at Patna) 

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"अभी तो लम्बा सफ़र है
और ऊंचाईयां भी बाकि हैं
अभी तो हज़ार हुए हैं
करोड़ों दिल पे राज बाकि है।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.36pm, 7th July 2013 at Patna)

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"जब भी आई तू याद प्रिय
नैनों को समझाने में गुजरी रात प्रिय।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.29pm, 7th July 2013 at Patna)

Saturday, July 6, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"मुझे अक्सर गुलाबों में काँटे नहीं दिखते
येही कुसूर है मेरा जमानेवाले कहते हैं।"

-शशिष कुमार तिवारी
(कल शाम रचित, पटना में)

Friday, July 5, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"जब भी मेरी उनसे निगाहें मिलती है
सच मानिये मेरी तबीयत बदलती है

ना जाने नशा कैसा दिल में उतरता है
आँखों के सामने मेरे हर रात मरती है।" 

-शशिष कुमार तिवारी
(8.29pm, 5th July 2013 at Patna)

बस दो पंक्तियाँ--

बस दो पंक्तियाँ---

"है अपने पास जमीं कम
पर आकाश पर ठिकाना किसका है?
जब खुदा तू खुद मेरे साथ है
तो फिर ये जमाना किसका है?"

-शशिष कुमार तिवारी
(7.58pm, 5th July 2013 at Patna)

बस कुछ पंक्तियाँ---

बस कुछ पंक्तियाँ---

"वो मुझसे दूर क्या होंगे
जो दिल में बसते हैं
भला उनका बूरा क्या हो
जो खुदा की महफ़िल में रहते हैं
लोग कहते हैं कि अक्सर
इश्क में दिल टूट जाता है
पर वो दिल क्या टूटेंगे
जो हर दिल से मिल के रहते हैं ...!"

-शशिष कुमार तिवारी
(7.39pm, 5th July 2013 at Patna)


बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"मैं अपने शब्दों में सही होता हूँ
लोग गलत समझे तो क्या करूँ 
मैं अपनी नीयत में साफ़ होता हूँ 
लोग अन्दर से हो जले तो क्या करूँ!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
(7.03pm, 5th July 2013 at Patna) 

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"मेरी आँखों में मोहब्बत के अब आँसू नहीं दिखते
लोग मिलते हैं पर अक्सर दिल से नहीं मिलते
बड़ा बेदर्द जमाना है जरा संभल के चलिए
गिरने के बाद अक्सर पहचानने वाले नहीं मिलते।"

-शशिष कुमार तिवारी
(कल शाम पटना में रचित)

Wednesday, July 3, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"कुछ वक्त दो मुझको मैं भी बादल बनूँगा
कुछ वक्त दो मुझको मैं भी बरसूँगा तुमपे
कुछ वक्त दो मुझको मेरे रंगों में खोने का
प्रिय!फिर मैं तेरी दुनिया का इन्द्रधनुष बनूँगा।"

-शशिष कुमार तिवारी
(12.03am, 4th July 2013 at Patna) 

दिल में भी इक आग का

दिल में भी इक आग का...

दिल में भी इक आग का लगना जरुरी है
बनने के लिए हीरा जमीं में तपना जरुरी है

यूहीं खामों-खा नहीं होती पूरी हसरतें दिल की
छूने के लिए आकाश कुछ तो गिरना जरुरी है

यूं तो बड़ा आसां है इश्क की शुरुवात कर देना
पूरा करने के लिए इसको हद से गुजरना जरुरी है

केवल शब्दों से नहीं बदलते हालात मौसम के
बदलने के लिए दुनिया खुद को बदलना जरुरी है

यूं तो ऊंचाईयों पर हो हर शख्स का चेहरा
कुछ करने के लिए अदभुत जिगर का रहना जरुरी है

-शशिष कुमार तिवारी
(7.00pm, 1st July 2013 at Patna)
{www.shashishkavi.blogspot.com}

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

मेरी ख़ामोशी तेरे दिल तक चली जाए तो कह देना
मेरी आँखों की नमीं रूह तक तेरी चल जाए तो कह देना
मैं फिर से जला दूंगा चिराग आँधियों से लड़ के
कोई जब साथ ना दे तेरा प्रिय इक बार कह देना...!

-शशिष कुमार तिवारी
(6.59pm, 3rd July 2013 at Hazaribag)

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"इतना अकेला हूँ कि कभी कभी खुद भी नहीं दिखता खुद को
न जाने किसकी तालाश है जो मिल के भी नहीं मिलता मुझको।"

-शशिष कुमार तिवारी
(6.29pm, 3rd July, 2013 at Hazaribag)

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"मुझे अपनी आँखों से मिटा दो पर 
दिल से भुलाओगे कैसे? 
चाहे काट दो पर परिंदों के 
जिद उड़ने की मिटाओगे कैसे?"

-शशिष कुमार तिवारी 
(अभी दो दिन पहले पटना में रचित)

Tuesday, July 2, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"हर आँख में प्यार का समंदर होना चाहिए
जो है तेरे बाहर वही अन्दर होना चाहिए
यूं तो बहुत हैं दुनिया को लूटने वाले यहाँ
दिलों को जीतने वाला तुझे 'सिकंदर' होना चाहिए।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.05pm, 1st July 2013 at Patna on Bike with Vineet Ji's Help)

Monday, July 1, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"तुम आते तो मौसम और भी मदहोश हो जाते
थे बेहोश से जो ख्वाब उनमें होश आ जाते ...!"

-शशिष कुमार तिवारी
(12.35pm, 1st July at Patna)