"दिल के दरवाजे धक्को से नहीं खुलते
तुम मुस्कुरा दो प्यार से येही हूनर काफी है।"
-शशिष कुमार तिवारी
(1.51pm, 20th July 2013 at Patna)
Wednesday, July 17, 2013
बस दो पंक्तियाँ---
"तेरी पलकों पे अपना आसमा बिठाने के लिए
मैं तैयार हूँ प्रिय
तेरे क़दमों में अपनी जमीं रख जाने के लिए।"
-शशिष कुमार तिवारी
(12.55am, 17th July 2013 at Patna)
Monday, July 15, 2013
बस दो पंक्तियाँ---
"दिल की बातों को बताने के लिए
हमें चाहिए एक दिल अपना बनाने के लिए।"
-शशिष कुमार तिवारी
(9.22pm, 15th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---
"मेरी किस्मत में चाँद तारे न थे
वो हसीन खूबसूरत नज़ारे न थे
बड़ी मुश्किल से पहुंचे हैं यहाँ तक प्रिय
सफ़र आप जैसे आसान हमारे न थे।"
-शशिष कुमार तिवारी
(9.06pm, 15th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---
"तेरे लबो पे एक मुस्कान की खातिर
हम पागल हुए इश्क में उड़ान की खातिर।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.21pm, 15th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---
"कुछ तुम बढ़ो कुछ हम बढ़ें
आओ दूरियां ख़तम करें
कुछ तुम बुनो कुछ हम बुनें
आओ ख्वाहिशें पूरी करें।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.09pm, 15th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---
"रोशन किया जिसको वही दीया जलाता है
दिल में बसाया जिसको वही अक्सर भुलाता है।"
-शशिष कुमार तिवारी
(5.53pm, 15th July 2013 at Hazaribag)
Sunday, July 14, 2013
बस दो पंक्तियाँ---
"खुदा के आँगन में खिलते हैं रिश्ते के फूल जो
अक्सर जिन्दगी के बाद भी लुटाते हैं खुशबूएं।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.35pm, 14th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---
"कितना खूब होता है पहले प्यार का एहसास, पर
ये आता नहीं दुबारा इक बार गुजर जाने के बाद।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.04pm, 14th July 2013 at Hazaribag)
बस दो पंक्तियाँ---
"एक छोटी सी मलाला ने दुनिया हिला डाला
तुम कहते हो अब भी तुम काफी नहीं अकेले।"
-शशिष कुमार तिवारी
(7.24pm, 14th July 2013 at Hazaribag)
Saturday, July 13, 2013
"और फिर येही से ..."
तुम्हारा प्रेम
जैसे किसी छोटे पौधे की जड़
और मेरा ह्रदय
जैसे नवीन नाजुक माटी
वक्त जैसे जैसे बीतता गया
जड़ें समाती गईं
माटी के अन्दर
फिर धीरे धीरे माटी ने
जड़ों को फैलने दिया
अपने रोम रोम में
और फिर
तुम बढ़ने लगे
खिलने लगे तुममें
सुन्दर सुन्दर पुष्प
और तुम्हारी खुशबू
फैलने लगी चारो तरफ
तुम सवरते चले गए
दिन प्रतिदिन
होते गए और भी आकर्षक
और फिर
एक दिन
जब सब लोग
तुमसे करने लगे प्यार
तुम इतराने लगे अपने पुष्पों पर
और भूल गए
अपना जड़ और मेरा ह्रदय
और येही से
शुरू हुआ फिर
एक और सुन्दर प्रेम का
अंत ... दुखांत!
-शशिष कुमार तिवारी
(2.49pm, 13th July 2013 at Patna)
बस दो पंक्तियाँ---
"मैं तेरी मोहब्बत का इन्द्रधनुष बनू प्रिय
तू मेरे आकाश का बादल तो बन जा!"
-शशिष कुमार तिवारी
(2.24pm, 13th July 2013 at Patna)
बस दो पंक्तियाँ---
"न पंख से न इरादों से
इंसान उड़ा जज्बातों से।"
-शशिष कुमार तिवारी
(1.10pm, 13th July 2013 at Patna)
Friday, July 12, 2013
बस दो पंक्तियाँ---
"मेरे अपने ही लोगों ने मुझे अनजाना बना दिया
तुझसे इश्क क्या किया बेगाना बना दिया।"
-शशिष कुमार तिवारी
(2.18pm, 12th July 2013 at Patna)
Tuesday, July 9, 2013
बस दो पंक्तियाँ---
"मुझे आँधियों का शौक है ये हवाये क्या डराएँगी
मुझे ख्वाहिशों का शौक है फ़रमाइशे क्या डराएँगी!"
-शशिष कुमार तिवारी
(9.26pm, 9th July 2013 at Patna)
बस दो पंक्तियाँ---
"मेरी निगाहें तुझको ढूंढती हैं हर मंजर में
जबकि दिल को पता है तू है मेरे ही अन्दर में।"
-शशिष कुमार तिवारी
(2.42pm, 9th July 2013 at Patna)
बस दो पंक्तियाँ---
"जमीं को देखकर आसमां का अंदाज़ा न लगा
मेरी फटी कमीज देखकर मेरा तमाशा न बना
है कूबत तो कभी अन्दर आके देख जरा
यूं बाहर से दूर बैठे समंदर का अंदाज़ा न लगा।"
-शशिष कुमार तिवारी
(7.15am, 9th July 2013 at Patna)
"वो मुझसे दूर क्या होंगे
जो दिल में बसते हैं
भला उनका बूरा क्या हो
जो खुदा की महफ़िल में रहते हैं
लोग कहते हैं कि अक्सर
इश्क में दिल टूट जाता है
पर वो दिल क्या टूटेंगे
जो हर दिल से मिल के रहते हैं ...!"
-शशिष कुमार तिवारी
(7.39pm, 5th July 2013 at Patna)
"मेरी आँखों में मोहब्बत के अब आँसू नहीं दिखते
लोग मिलते हैं पर अक्सर दिल से नहीं मिलते
बड़ा बेदर्द जमाना है जरा संभल के चलिए
गिरने के बाद अक्सर पहचानने वाले नहीं मिलते।"
"कुछ वक्त दो मुझको मैं भी बादल बनूँगा
कुछ वक्त दो मुझको मैं भी बरसूँगा तुमपे
कुछ वक्त दो मुझको मेरे रंगों में खोने का
प्रिय!फिर मैं तेरी दुनिया का इन्द्रधनुष बनूँगा।"
-शशिष कुमार तिवारी
(12.03am, 4th July 2013 at Patna)
मेरी ख़ामोशी तेरे दिल तक चली जाए तो कह देना
मेरी आँखों की नमीं रूह तक तेरी चल जाए तो कह देना
मैं फिर से जला दूंगा चिराग आँधियों से लड़ के
कोई जब साथ ना दे तेरा प्रिय इक बार कह देना...!
-शशिष कुमार तिवारी
(6.59pm, 3rd July 2013 at Hazaribag)
"हर आँख में प्यार का समंदर होना चाहिए
जो है तेरे बाहर वही अन्दर होना चाहिए
यूं तो बहुत हैं दुनिया को लूटने वाले यहाँ
दिलों को जीतने वाला तुझे 'सिकंदर' होना चाहिए।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.05pm, 1st July 2013 at Patna on Bike with Vineet Ji's Help)
Monday, July 1, 2013
बस दो पंक्तियाँ---
"तुम आते तो मौसम और भी मदहोश हो जाते
थे बेहोश से जो ख्वाब उनमें होश आ जाते ...!"