Tuesday, July 9, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"मुझे आँधियों का शौक है ये हवाये क्या डराएँगी
मुझे ख्वाहिशों का शौक है फ़रमाइशे क्या डराएँगी!" 

-शशिष कुमार तिवारी
(9.26pm, 9th July 2013 at Patna)

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