बस दो पंक्तियाँ---
"मुझे आँधियों का शौक है ये हवाये क्या डराएँगी
मुझे ख्वाहिशों का शौक है फ़रमाइशे क्या डराएँगी!"
-शशिष कुमार तिवारी
(9.26pm, 9th July 2013 at Patna)
"मुझे आँधियों का शौक है ये हवाये क्या डराएँगी
मुझे ख्वाहिशों का शौक है फ़रमाइशे क्या डराएँगी!"
-शशिष कुमार तिवारी
(9.26pm, 9th July 2013 at Patna)
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