ले चल मुझे दूर अपने संग
कि तुझ बिन जीना मुमकिन नहीं
थम सी गई है जिन्दगी की नदी
कि तुझ बिन लहरों का होना मुमकिन नहीं
बसा ले अपनी बाँहों में
कि जन्नत भी इस से अधिक सुन्दर नहीं
मुझे समां ले अपनी पनाहो में
कि कोई दूजा मेरा सपना नहीं
कुछ पल गुजार मेरे साथ भी
वरना जिन्दगी गुजर नहीं पायेगी
तू रह हर मेरी यादों में
वरना ये आँखे फिर खुल नहीं पाएंगी
दूर इस दुनिया से बस तेरा साथ चाहा है मैंने
जीने के लिए तेरे लबों का एहसास चाहा है मैंने
तू रह जहा भी
मुझे अपना एहसास दे जा
जिन्दगी तू मुझे जीने इक आस दे जा
बस तुझी में फ़ना हो जाऊ
इतनी मोहब्बत दे जा
आखरी सांस तक मुझे अपनी खुशबू दे जा
जिन्दगी आ मुझे ले चल दूर कही अपनी बाँहों में,,,,,,,,,
