Wednesday, September 5, 2012



ले चल मुझे दूर अपने संग 
कि  तुझ बिन जीना मुमकिन नहीं 
थम सी गई है जिन्दगी की नदी 
कि तुझ बिन लहरों का होना मुमकिन नहीं 
बसा ले अपनी बाँहों में 
कि जन्नत भी इस से अधिक सुन्दर नहीं 
मुझे समां ले अपनी पनाहो में 
कि  कोई दूजा मेरा सपना नहीं 
कुछ पल गुजार मेरे साथ भी 
वरना जिन्दगी गुजर नहीं पायेगी 
तू रह हर मेरी यादों में 
वरना ये आँखे फिर खुल नहीं पाएंगी 
दूर इस दुनिया से बस तेरा साथ चाहा है मैंने 
जीने के लिए तेरे लबों का एहसास चाहा है मैंने 
तू रह जहा भी 
मुझे अपना एहसास दे जा 
जिन्दगी तू मुझे जीने इक आस दे जा 
बस तुझी में फ़ना हो जाऊ 
इतनी मोहब्बत दे जा 
आखरी सांस तक मुझे अपनी खुशबू दे जा 
जिन्दगी आ मुझे ले चल दूर कही अपनी बाँहों में,,,,,,,,,