Wednesday, February 27, 2013

"Jinko paana tha unhe hi khote chale gaye,
Ham har roj naye khwaab sajote chale gaye.

Vo gaye to unki yaade rah gayi hai paas me,
Ham saari raat unki yaado me rote chale gaye.

Kai mukaam yu to haasil kiye hamne dekhte dekhte,
Khud se hi is darmya faasle badhate chale gaye.

Badi der se lagti hai aag aajkal bheed me,
Ham chingariyon ko hatheli pe bote chale gaye.

Jinko paana tha unhe hi khote chale gaye...!!!"

-Shashish Kr Tiwari, (Composed at 5.02pm, 27th Feb, 2013.)

Tuesday, February 19, 2013

उसे रौशनी दे मैं अँधेरे में जी लूँगा
उसे उम्मीद दे मैं नाउम्मीद जी लूँगा

उसे हंसने दे जीभर के तू
मैं मुस्कुरा के जी लूँगा

उसके पुरे कर हर स्वप्न तू
मैं जरूरतों में जी लूँगा

उसको उड़ने दे खुले आसमा में तू
मैं जमी पे रेंग के जी लूँगा

उसे जीने दे उसके मन से तू
मैं तेरे मन से जी लूँगा


Monday, February 18, 2013

 "बात इसकी नहीं"


तेरा छुप छुप के मुस्कुराना

मुझे अच्छा लगता है।

देख मुझे तेरा पलके झुकाना

मुझे अच्छा लगता है।

तू दौड़ के

आती है जब मेरी बांहों में

तेरा मुझसे लिपट जाना

मुझे अच्छा लगता है।

तेरा शरारत करना

मुझसे लड़ना झगड़ना

छोटी सी बात पे

यू बच्चों सा तेरा रूठ जाना

मुझे अच्छा लगता है।

तू कैसी है ?

प्रिये ! बात इसकी नहीं।

तेरा आना, तेरा होना

तुझे देखते रहना 

मुझे अच्छा लगता है

हाँ प्रिय! मुझे अच्छा लगता है!!!

-शाशिष कुमार तिवारी, 12.48PM, Today only!