बस दो पंक्तियाँ---
"खुदा के आँगन में खिलते हैं रिश्ते के फूल जो
अक्सर जिन्दगी के बाद भी लुटाते हैं खुशबूएं।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.35pm, 14th July 2013 at Hazaribag)
"खुदा के आँगन में खिलते हैं रिश्ते के फूल जो
अक्सर जिन्दगी के बाद भी लुटाते हैं खुशबूएं।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.35pm, 14th July 2013 at Hazaribag)
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