तुम कहते हो
रिश्तें कांच जैसे होते हैं
टूटने पे चुभते हैं
हाँथो में संभाल के रखु
क्योकि टूटने में पल भर
और जुड़ने में वर्षों लेते हैं
लेकिन मुझे लगता है
रिश्तें बीज जैसे होते हैं जो
अगर एक बार दिल की जमीं पे
बो दिए जाए तो न जाने
कितने जनम एक विशाल पेड़ बनकर रहा करते हैं
आंधियां भी उन्हें जड़ से नहीं उखाड़ सकती
अधिक से अधिक दो चार डालियाँ और
पांच छे पत्ते टूटेंगे
जो की कुछ ही दिनों के अन्दर फिर से उग आयेंगे .