Friday, May 31, 2013

हमें इश्क है तुमसे येही खता कर बैठे हैं
तुम लौट आओगे दिल को इत्ला कर बैठे हैं

अब देखते हैं कब तक जुदाई दूर करती है
तुम कितना चाहते हो और हम कितना प्यार करते हैं

कल जब हवाओं ने तुम्हारी खुशबूएं दे दीं
तभी से पुराने घर को बड़ा सजा के बैठे हैं

अब तो धडकनों में भी धड़कते रहते हो तुम हर पल
इसी को महसूस कर हम जिन्दगी में हर सांस भरते हैं

तुमसे शुरू तुम्हीं पे ख़तम होती जो कहानी है
दीवानगी में उस कहानी से हम नशा कर बैठे हैं ...

हमें इश्क है तुमसे येही खता कर बैठे हैं।

-शशिष कुमार तिवारी
(3.32pm, 31st May at Hazaribag)
बस दो लाईनें---

"मेरी ही गलतियाँ अक्सर सिखाती हैं बहुत मुझको
कभी खामोश बैठू तो रुलाती हैं बहुत मुझको।"

-शशिष कुमार तिवारी
(8.12pm, 31st May at Hazaribag)


बस दो लाईनें...

"माना कि नहीं मिलता सबको इश्क दुनिया में
पर अक्सर हार के इश्क में दिल जीत जाता है।"

-शशिष कुमार तिवारी 
बस दो लाइनें...

"जब भी गौर से देखो बड़े सच्चे लगते हैं
बच्चे जब तक हों बच्चे बड़े अच्छे लगते हैं।"

-शशिष कुमार तिवारी 
किसी की निगाहों में चाँद हम भी तो होंगे
दुवाओं में किसी की मांग हम भी तो होंगे

कहीं तो खुबसूरत है कोई जो इश्क करता है
उसके ख्यालों में चमकते हम भी तो होंगे

कोई तो गिन रहा होगा इंतजार की घड़िया
कि उसकी निगाहों में प्यार हम भी तो होंगे

खुदा ने खुद रची जब प्यार की इतनी बड़ी महफ़िल
लबों पे किसी के इज़हार हम भी तो होंगे

बनाता होगा कहीं कोई सपनों का महल अपना
उसके खुबसूरत घर का इक हिस्सा हम भी तो होंगे !

किसी की निगाहों में चाँद हम भी तो होंगे....

-शशिष कुमार तिवारी
(2.19pm, 31st May 2013 at Hazaribag)

Thursday, May 30, 2013

"प्यार का मतलब समझना बड़ा मुश्किल है प्रिय
तुम एक नज़र दो और मैं बदले में सारी कायनात दे दू
कितनी मोहब्बत है तुमसे अब क्या बताऊँ तुम्हें
कहो तो अपनी जिन्दगी सारे सपने तुम्हारे नाम दे दू

                                       आओ आज मुठ्ठियों में तुम्हारे चाँद दे दू ...."

"आओ आज मुठ्ठियों में तुम्हारे चाँद दे दू
तुम्हारी एक मुस्कुराहट के लिए सच में आज जान दे दू
तुम कहो तो बदल दू मैं खुद को इस कदर
तुम्हें निगाहें तुम्हें अपनी हर एक साँस दे दू

                            आओ आज मुठ्ठियों में तुम्हारे चाँद दे दू ...."

Monday, May 27, 2013

 जहाँ है रौशनी तेरी 
वही है जिन्दगी अपनी 
बिन तेरे नहीं कुछ भी 
अब तो हैसियत अपनी 


Friday, May 24, 2013

थी ख्वाहिश नहीं उसकी
कि हम में कोई दूरी होगी
पता है मुझको, शायद
उसकी भी कुछ मज़बूरी होगी

उसने तो अपने दिल पे
लिखा था मेरा नाम बहुत
फिर अक्षर अक्षर काटा होगा
उठानी पड़ी बहुत पीड़ा होगी
पता है मुझको, शायद
उसकी भी कुछ मज़बूरी होगी

वो पूरी रात न सोया करती थी
जी भर के रोया करती थी
जिस दिन न देखे वो मुझको  
पल पल तडपा करती थी
अब न जाने वो हर पल में
मुझ बिन कितना मरती होगी
 थी ख्वाहिश नहीं उसकी
कि हम में कोई दूरी होगी
पता है मुझको, शायद
उसकी भी कुछ मज़बूरी होगी।

-शशिष कुमार तिवारी



"यूँ अकेले अकेले"

खुशियाँ नहीं मिलती
ग़म नहीं मिलते
यूँ अकेले अकेले
जिन्दगी के
मौसम नहीं मिलते.

थी हसरते मिलने की
पर क्या करें खुदा
कभी वो नहीं मिलते
कभी हम नहीं मिलते
यूँ अकेले अकेले
जिन्दगी के
मौसम नहीं मिलते

इक उम्मीद है बाकि
और कुछ नहीं है पास
इश्क के रस्ते में
सच है
सबको हमदम नहीं मिलते
यूँ अकेले अकेले
जिन्दगी के
मौसम नहीं मिलते

जब तक सांस बाकि है
मिल लिया करो
जो कुछ भी हो शिकवा-गिला
कह दिया करो
अफ़सोस के आँगन में
हकीकत में सनम नहीं मिलते
यूँ अकेले अकेले
जिन्दगी के
मौसम नहीं मिलते।।।

-शशिष कुमार तिवारी





Thursday, May 23, 2013

युहीं सितारों से चमकते रहो तुम
युहीं खुश्बुवों से महकते रहो तुम

छू लो आसमा को और हाथों में चाँद भर लो
युहीं हवाओं से आगे बढ़ते रहो तुम

है कुछ भी नामुमकिन नहीं तुम्हारे वास्ते
खुदा की खिदमत में हर रोज सवरते रहो तुम


-शशिष कुमार तिवारी




Tuesday, May 14, 2013

लड़की

जैसे तुम एक "खिलौना"
और सब के सब "बच्चे"
मुझे इस बात का डर नहीं कि.....
वे तुम्हें खेलते जायेंगे
डर तो इस बात का है
कि वो कहीं तुम्हें तोड़ न दें ....
कहीं गिरा न दें तुम्हें किसी ऊंचाई से .....
और फिर डर तो इस बात का है कि .....

तुम्हें जोड़ने के बजाये
कहीं दूसरा खरीदने न निकल जाये 
बाज़ार में!
माँ 
तुम बिन
अगर सबकुछ भी हो
तो है
बस कुछ नहीं जितना,
और जब तुम हो
तो कुछ नहीं भी है
सबकुछ जितना।
तुम्हीं समग्र हो
सम्पूर्ण हो
और हो शाश्वत
प्रारंभ से अंत तक !

-शशिष कुमार तिवारी