Friday, October 21, 2016

मुड़े मुड़े से हैं किताब ए इश्क़ के पन्ने....
कौन है जो मेरे बाद मुझे पढता है!

Sunday, October 9, 2016

तुम्हारी बेरुखियां

"ये तुम्हारी बेरुखियां भी
हैं बिलकुल तुम्हारी जैसी
नासमझ नादान
न मुझे जानती हैं
न मेरी जिद्द को!"

-शशिष