Tuesday, August 9, 2016

"बहुत मुश्किल है
तुम्हें परिभाषित करना
तुम्हें शब्दों में समेटना
तुम दुनिया के इन शब्दों से परे हो
तुम्हारी परिधि अनंत है
प्रिय तुम प्रेम हो
तुम्हें बस एहसास कर लेना ही
परिभाषित कर देता है
मुझे और मेरी जिंदगी को!"

-शशिष
(9th Aug '16, 4.18pm, Bhagalpur)

Monday, August 8, 2016

"जिंदगी के
कैनवास पर
यादों के रंग ने
जो बनाई है तस्वीर
वही मैं हूँ ,वही तुम हो!"

-शशिष कुमार तिवारी
(2.15pm, 8th Aug '16, Bgp)

Friday, August 5, 2016

"इंतज़ार किया है मैंने
बहोत
हां बहोत
और मैंने सीखा है
ये इंतज़ार करना
उस चाँद से
जो दिनभर
तो ओझल होता है
सूरज की रौशनी में
पर चमकता है
शब में
नूर आसमां का बनके!"

-शशिष कुमार तिवारी