"बहुत मुश्किल है
तुम्हें परिभाषित करना
तुम्हें शब्दों में समेटना
तुम दुनिया के इन शब्दों से परे हो
तुम्हारी परिधि अनंत है
प्रिय तुम प्रेम हो
तुम्हें बस एहसास कर लेना ही
परिभाषित कर देता है
मुझे और मेरी जिंदगी को!"
-शशिष
(9th Aug '16, 4.18pm, Bhagalpur)
तुम्हें परिभाषित करना
तुम्हें शब्दों में समेटना
तुम दुनिया के इन शब्दों से परे हो
तुम्हारी परिधि अनंत है
प्रिय तुम प्रेम हो
तुम्हें बस एहसास कर लेना ही
परिभाषित कर देता है
मुझे और मेरी जिंदगी को!"
-शशिष
(9th Aug '16, 4.18pm, Bhagalpur)