Sunday, June 30, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"मेरी मानो कि मुश्किल और भी आसान हो जाती
गर चेहरे पे तेरे दर्द में भी एक मुस्कान आ जाती।"

-शशिष कुमार तिवारी
(1st July at 12.00pm in Patna)

Friday, June 21, 2013

"लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे" 

ना मंजूर तो ना सही 
हम लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे 
आँधियों तुम हार जाओगे 
हम गिर के उठ जाना नहीं छोड़ेंगे 

हमने ख़्वाब देखें हैं 
तो ख़्वाबों के साथ जियेंगे 
मुश्किलों हम दूभ हैं 
कट जाने के बाद भी उग जाना नहीं छोड़ेंगे 
ना मंजूर तो ना सही 
हम लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे 

उन्हें हक़ है 
वो तोड़ दें रिश्ता 
बंद कर दें दरवाजे घर के 
पर अपनी भी फितरत है ये 
अश्क बन आँखों में आना नहीं छोड़ेंगे 
ना मंजूर तो ना सही 
हम लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे 

जितनी कोशिश करले किश्मत 
हमें रोक लेने की 
हम दरिया हैं 
सबको चीरते हुए बह जाना नहीं छोड़ेंगे 
लाख बड़ी क्यूँ न हों मजहबी दीवारें 
हम दिलों को दिलों से मिलाना नहीं छोड़ेंगे 
ना मंजूर तो ना सही 
हम लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे!

-शशिष कुमार तिवारी
(1.38am, 21st June at Patna) 

Thursday, June 20, 2013

बस  दो पंक्तियाँ---

"दिल कहता कि इज़हार कर लूं 
मैं जीभर के तुझसे प्यार कर लूं 

कितने  ख्वाब देखूं और तोडूं
तू मिल तो थोड़ी बात कर लूं।"

-शशिष कुमार तिवारी
(7.08pm, 20th June at Patna)

Wednesday, June 12, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

""आग बुझने के बाद भी धुवां अभी बाकि है 
दिल टूटने के बाद भी दुवा अभी बाकि है 
कुछ ऐसा ही होता है इश्क में अक्सर 
कि मर जाने के बाद भी मर जाना अभी बाकि है।""

-शशिष कुमार तिवारी 
(12.06pm, 13th June at Patna)

बस दो पंक्तियाँ---

"मुझे मशहूर बनने की ख्वाहिश नहीं खुदा 
बस इतनी सी हसरत है तू मुझको जान जा जरा।"

शशिष कुमार तिवारी 
(7.51pm, 12th June at Patna)

Tuesday, June 11, 2013

 बस दो पंक्तियाँ--

"मुझे बदनाम करने की
जिस किसी ने भी कोशिश की
तेरा शुक्रिया खुदा
तूने उसका नाम कर दिया..."

-शशिष कुमार तिवारी
(1.23pm on 11th June at Patna )

Monday, June 10, 2013

गॉडफ़ादर मल्हन सर, सनी अरोरा जी और इबिज़ के 12 वीं वर्षगांठ को दिल से समर्पित पंक्तियाँ---

"इबिज़ कविता"

युग बीतेंगे
पर न बीतेगा ये दौर कभी इबिज़ का
हम मर जायेंगे पर अमर रहेगा
प्यार दिलों में इबिज़ का

जब इबिज़ करना तो दिल से करना
ये व्यापार नहीं बस पैसों का
ये संस्कृति है
संस्कार है
और प्यार हमारे आपस का
युग बीतेंगे
पर न बीतेगा ये दौर कभी इबिज़ का
हम मर जायेंगे पर अमर रहेगा
प्यार दिलों में इबिज़ का

जब बाधाएं आयें
और रोके तुमको
तब हथियार उठाना इबिज़ एथिक्स का
फिर बढ़ते जाना जुबां पे लिए
जयकार हमेशा इबिज़ का
युग बीतेंगे
पर न बीतेगा ये दौर कभी इबिज़ का
हम मर जायेंगे पर अमर रहेगा
प्यार दिलों में इबिज़ का

हम मिशन एक हैं
परिवार एक हैं
दिल एक हैं
धड़कन हैं
यूँ तो हमसबके गुरु बहुत हैं
पर महागुरु तो सिर्फ एक हैं
ये तो बस एक जीवन है
हमारा हर जनम हो इबिज़ का
हमारा हर जनम हो इबिज़ का
युग बीतेंगे
पर न बीतेगा ये दौर कभी इबिज़ का
हम मर जायेंगे पर अमर रहेगा
प्यार दिलों में इबिज़ का!!!

-शशिष कुमार तिवारी



Wednesday, June 5, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

"जलो तो रौशनी कर दो जहाँ में 
बुझो तो हो चुका हो सवेरा ..."

-शशिष कुमार तिवारी 
बस दो पंक्तियाँ--

"झूठें कसमें-वादें न हों
हों तो पक्के
या फिर इरादें न हों।"

-शशिष कुमार तिवारी 

Monday, June 3, 2013

अँधेरा है आ इक रौशनी जलाते हैं 
सवेरा है आ अब गले लग जाते हैं 

कब तक लड़ेंगे यूँ अकेले भला 
आ मिल के अब तो एक हो जाते हैं 

तू सागर और मैं साहिल ये कब तक चलेगा 
आ या तो पूरा साहिल या पूरा सागर बन जाते हैं 

जुदा होके फूल से कब तक रहेगी खुशबू भला
आ भटके परिंदों को उनका घर दिखाते हैं

अँधेरा है आ इक रौशनी जलाते हैं  
सवेरा है आ अब गले लग जाते हैं। 

-शशिष कुमार तिवारी 
(11.37am, 4th June at Hazaribag)

Sunday, June 2, 2013

दिलों के जख्म भी यारों सवरतें हैं कभी कभी
हम यूहीं बेवजह मरते हैं कभी कभी

कोई अनजान सा चेहरा दिल को इतना भा जाता है
कि हम तलाशते हैं उसको अपनों में कभी कभी

कोई जब रूठ जाता है दिल टूट जाता है
इश्क के महफ़िल में ऐसे पल आते हैं कभी कभी

दूर होके भी कोई दिल के पास होता है
लहरे चूम लेती हैं तपती धूलों को कभी कभी

ये इश्क चीज ऐसी है दिल खो ही जाता है
फिर खोजने में ज़माने लगते हैं कभी कभी ....

दिलों के जख्म भी यारों सवरतें हैं कभी कभी।

-शशिष कुमार तिवारी
(1.25pm, 1st June at Hazaribag)