Friday, August 13, 2010

गलती ऐसी न करना

तुम चाहे जितना बड़ा बनो
पर गलती ऐसी न करना

तुम समां न पाओ अपनी माँ के आँचल में
इतना बड़ा भी न बनना 

तुम जाओ जितनी दूर सही
पर माँ की बूढी नज़रों से दिखते रहना  

तुम चाहे युग में रहो कही
पर माँ की ख़ामोशी को सुनते रहना

तुम चाहे उड़ो सर्वोच्च ऊंचाई पे
पर माँ की चरणों में गिरते रहना 

तुम चाहे जिओ जितने फैशन को
पर माँ की ममता को खुश रखना

तुम चाहे जितना बड़ा बनो
माँ की आँचल में अटते रहना.