"हर किसी में कुछ खूबियां हैं , हर किसी में कुछ खामियां हैं! खूबियों और खामियों के बीच एक जिंदगी है , एक यात्रा है , एक कहानी है! कभी खूबियों की ख़ुशी है तो कभी खामियों का रोना है! जिंदगी कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ! कोई भी परफेक्ट तो नहीं है यहाँ! ना कोई इंसान ना कोई चीज; हर जगह सुधार की गुंजाईश है। सुधारते जाना ही जिंदगी की सबसे बड़ी सीख है। आज आप जो कुछ भी हैं कल आप इससे बेहतर बन सकते हैं , कल को हमेशा आज से बेहतर बनाया जा सकता है लेकिन इसके लिए आज को खोने से बचना होगा! आज को अच्छे से सीचेंगे तो जरूर एक खूबसूरत कल को पैदा होगा। पर समस्या ये है कि आज यूहीं हाथ से निकल जाता है , बिना कुछ सार्थक किये ही छू मंतर हो जाता है ; और फिर हर रोज सिर्फ बेहतर कल की उम्मीदें दिल पे धीरे धीरे बोझ बनने लगती हैं! जी हाँ! उम्मीदें भी अगर ईमानदारी के साथ ना पाली जाएँ तो धीरे धीरे मन को एक अवसाद की तरफ ले जाने लगती हैं। हमारी सबसे बड़ी बेईमानी ये है कि हम अपने खामियों को अपने साथ रख कर वो सब कुछ पा लेना चाहते हैं जिनके लायक अभी हमारी खूबियां हैं ही नहीं! जिंदगी को झूठी उम्मीदें मत दीजिये ; झूठे ख्वाब मत दीजिये ; हो सके तो एक ही सही पर एक ऐसा ईमानदार स्वप्न दीजिये जिसके लिए आपके दिल को हाँ कहने में एक पल भी सोचना न पड़े ; जिस एक ख्वाब के लिए आप ईमानदारी से खुद को बेहतरीन समझते हैं या फिर हौसला रखते हैं उस एक ख्वाब के लिए खुद को बेहतरीन बनाने का, अपनी खामियों पर विजय पाने का, तभी जाकर आपकी कहानी को वो नायक मिलेगा जिसका इंतज़ार ना जाने कितनों को है!"
-शशिष
(24th Nov, 16; 12.25am, Bhagalpur)
-शशिष
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