Wednesday, November 23, 2016

"हर किसी में कुछ खूबियां हैं , हर किसी में कुछ खामियां हैं! खूबियों और खामियों के बीच एक जिंदगी है , एक यात्रा है , एक कहानी है! कभी खूबियों की ख़ुशी है तो कभी खामियों का रोना है! जिंदगी कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ! कोई भी परफेक्ट तो नहीं है यहाँ! ना कोई इंसान ना कोई चीज; हर जगह सुधार की गुंजाईश है। सुधारते जाना ही जिंदगी की सबसे बड़ी सीख है। आज आप जो कुछ भी हैं कल आप इससे बेहतर बन सकते हैं , कल को हमेशा आज से बेहतर बनाया जा सकता है लेकिन इसके लिए आज को खोने से बचना होगा! आज को अच्छे से सीचेंगे तो जरूर एक खूबसूरत कल को पैदा होगा। पर समस्या ये है कि आज यूहीं हाथ से निकल जाता है , बिना कुछ सार्थक किये ही छू मंतर हो जाता है ; और फिर हर रोज सिर्फ बेहतर कल की उम्मीदें दिल पे धीरे धीरे बोझ बनने लगती हैं! जी हाँ! उम्मीदें भी अगर ईमानदारी के साथ ना पाली जाएँ तो धीरे धीरे मन को एक अवसाद की तरफ ले जाने लगती हैं। हमारी सबसे बड़ी बेईमानी ये है कि हम अपने खामियों को अपने साथ रख कर वो सब कुछ पा लेना चाहते हैं जिनके लायक अभी हमारी खूबियां हैं ही नहीं! जिंदगी को झूठी उम्मीदें मत दीजिये ; झूठे ख्वाब मत दीजिये ; हो सके तो एक ही सही पर एक ऐसा ईमानदार स्वप्न दीजिये जिसके लिए आपके दिल को हाँ कहने में एक पल भी सोचना न पड़े ; जिस एक ख्वाब के लिए आप ईमानदारी से खुद को बेहतरीन समझते हैं या फिर हौसला रखते हैं उस एक ख्वाब के लिए खुद को बेहतरीन बनाने का, अपनी खामियों पर विजय पाने का, तभी जाकर आपकी कहानी को वो नायक मिलेगा जिसका इंतज़ार ना जाने कितनों को है!"

-शशिष
(24th Nov, 16; 12.25am, Bhagalpur)

Monday, November 21, 2016

"दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत लोगों के पास कोई खास सपने नहीं होते! वो अपनी जिंदगी को बिलकुल वैसे ही जीते हैं जैसे उनके बाप-दादाओं ने जी होती है! उनके पास कुछ नया और बड़ा करने की कोई सोच नहीं होती। वो एक साधारण सी जिंदगी जीने में कितनी दफे मरते हैं ये उन्हें भी नहीं पता होता! वो लोग जो सपने नहीं देखते दरअसल अपने अंदर झांक के नहीं देखते। वो अपने बारे में कुछ खास नहीं जानते; वो क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते हैं इस बात का निर्धारण उनके कुछ ऐसे संबंधी लोग करते हैं जो खुद ही जिंदगी को काट रहे होते हैं और जिनके लिए जिंदगी का मतलब एक सरकारी नौकरी और सुरक्षा से बढ़कर और कुछ नहीं होता! जब आपको सलाह देने वाले लोगों की सोच आपकी सोच से बढ़कर नहीं होती तो वो सलाह के बदले आपको डर देते हैं! और जब आपको सलाह देने वाले लोगों की सोच आपकी सोच से मिलती है या बढ़कर कर होती है तो वो आपको सलाह के साथ साथ हौसला देते हैं! जिंदगी में बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आप सलाह किससे लेते हैं; आप किसके साथ अपने सपनों को साझा करते हैं! याद रखिये जो लोग आपसे ये कहते हैं कि आप अपने सपनों को नहीं पा सकते वो दरअसल ये कहते हैं कि वो अगर आपकी जगह होते तो ऐसे बड़े सपनों को पाने में अपना वक्त बर्बाद नहीं करते बल्कि कुछ छोटा सोचते और आराम से जीते! अब सवाल ये हैं कि क्या आप भी उनकी तरह ही जीना चाहते हैं; क्या आपके लिए भी आराम ही सर्वोपरि है; क्या आप भी संघर्ष करते रहने से बचना चाहते हैं; क्या आपको भी संघर्ष एक बोझ की तरह लगता है; क्या आप भी केवल खुद के बारे में सोचना चाहते हैं; क्या आप भी हार मान जाना चाहते हैं???
जवाब दीजिये!!!

"उनकी बातों का विश्वास मत कीजिये
जिनकी बातों में
आपकी बातों जैसा दम नहीं!
आपको झूठे हौसलों की जरुरत क्या है
आपकी सांसें आपके साथ है
ये भी तो कुछ कम नहीं!

चलते रहने से मंजिल मिल ही जाती है
आज नहीं तो कल मुसीबत टल ही जाती है,
डरने वालों के हाथों में कुछ नहीं होता
लड़ने वालों की किस्मत खिल ही जाती है!"

-शशिष



Saturday, November 19, 2016

"जब नफरत करना काफी नहीं रह जाता तो लोग आपके बारे में अफवाहें उड़ाने लगते हैं! दरअसल ऐसे लोग खुद की असफलताओं से बहुत हताश हो चुके होते हैं; कहीं न कहीं उनकी जिंदगी उदासियों और निराशाओं से घिरी होती है! और ऐसे में उनके पास आपकी बुराई करने के सिवा और कोई काम नहीं रह जाता! ऐसे लोग जो जीवन में खुद हताश हों; आपकी तरक्की से जलते हों, उनकी किसी भी बात पर ध्यान देना महज एक मूर्खता होती है! आप ऐसी स्तिथि में बेकार के सवालों का और अफवाहों का जवाब देने में अपना कीमती वक्त और दिमाग बर्बाद ना करें बल्कि अपना पूरा ध्यान अपने काम पे लगाएं! सामने वाले को उसका वक्त आपके बारें में बात कर के बर्बाद करने दें! जिन सवालों की हैसियत आपके कद से कहीं दूर दूर तक मिलती ही नहीं, वैसे सवालों से आपका कोई नाता नहीं होना चाहिए। जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत सारे बेकार के सवालों का जवाब हमें शब्दों में देने की कोशिश नहीं करनी चाहिए बल्कि सिर्फ मुस्कुरा देना चाहिए! कई सवाल खड़े होते हैं जब आप बड़े होते हैं! किसी रात अगर पूरी दुनिया भी मिलकर ये अफवाह उड़ा दे कि अब कभी कोई सूरज नहीं निकलेगा; कि अब कभी कोई भोर नहीं होगी, तो इससे सूरज की रोशनी पे कोई फर्क नहीं पड़ जायेगा! अफवाहों के बादल से सत्य कभी ढका नहीं जा सकता, हां कुछ पल के लिए ओझल जरूर किया जा सकता है! बेवकूफ होते हैं वो लोग जो अफवाहें फैलाते हैं और महाबेवकूफ होते हैं वो लोग जो उन बेवकूफ लोगों द्वारा फैलाये अफवाहों पर विश्वास करते हैं! अफवाहों और बेकार के सवालों को डस्टबिन में फेंक दीजिये उनकी सही जगह वही है!"

"अफवाहों की उम्र का
पता था मुझे

जो मैंने नकार दिया
मुस्कुरा कर
पहली नज़र में ही उन्हें
वो बर्बाद हो गईं
पल भर में तड़पते तड़पते!"

-शशिष 

Friday, November 18, 2016

"क्या आप जानते हैं कि वो कौन सी एक चीज है जो हम सबका इंतज़ार कर रही है....? हाँ ! आप जानते हैं....'मौत'! जी हाँ! मौत हम सबका इतंज़ार कर रही है और उसे पता है कि हम रास्ते में हैं! लेकिन उससे बड़ी बात ये है कि क्या हमें पता है कि हम रास्ते में हैं?!? अगर पता है और एहसास भी है तो फिर हम अपना वक्त क्यों बर्बाद कर रहें हैं? क्यों हम किसी अनुकूल स्तिथि का इंतज़ार कर रहें हैं? हमें चाहिए कि हम अपनी मेहनत और ईमानदारी से मौजूदा परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनायें। किसी अच्छे वक्त के इंतज़ार में रुकने से कहीं बेहतर है कि हम बुरे वक्त में भी मुस्कुरा कर आगे बढ़ते रहें। आगे बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है! जब आप एक बड़े उद्देश्य का पीछा करते हैं तो निःसंदेह हज़ार नकारात्मक चीजें आपका पीछा करती हैं, अगर आपकी गति तेज है तो ये नकारात्मक चीजें कभी आपको पकड़ नहीं पायेंगी, थक जायेंगी और हार मान लेंगी! लेकिन अगर आप रुके तो शायद ये नकारात्मक शक्तियां आपकी सोच को पकड़ कर ऐसी खाई में डाल देंगी जहाँ से अगर सोच लौट भी आये तो वो कम से कम चोटिल जरूर होगी! आपकी सोच ही आपकी रफ़्तार तय करती है; आपकी सोच ही आपको आपके मंजिल तक लेके जाती है! इससे पहले कि आपकी नकारात्मक सोच आपको बदल दे, आगे बढिए, डरना छोड़िये, अपने आप पर शक करना बंद कीजिये और इंतज़ार करना छोड़ के कुछ ऐसा कीजिये कि पूरी दुनिया आपका इंतज़ार करे!"

"एक एक पल
एक एक दिन
हाथ की मुट्ठी में से
रेत की तरह निकलते जाता है
फिसलते जाता है
और हम ताउम्र
मुट्ठी बांध कर कुछ यूँ खड़े रहते हैं
कि जैसे सारा खजाना
अटका हो हमारी मुट्ठी में!"

-शशिष

Wednesday, November 16, 2016

"कुछ लोग
मेरी आँखों में
खुशियों के पौधे बो गए
और
कुछ लोगों ने
मुझको ये सिखलाया
कि पौधे यूंही बड़े नहीं होते!"

-शशिष
"लोग आपको सुनते जरूर हैं लेकिन बड़े कम ही लोग आपको समझने के लिए सुनते हैं! सुनना अलग बात है और किसी को समझने के लिए सुनना दूसरी बात है। ज्यादातर समस्याएं इसलिए आती हैं कि हमलोग जवाब देने लिए सुनते हैं, ना कि किसी को समझने के लिए! अगर कोई किसी को समझने के लिए सुने तो जीवन की बहुत सारी समस्याएं अपने आप समाप्त हो सकती हैं। लेकिन कई बार हम लोगों के बारे में पहले ही एक धारणा बना लेते हैं और फिर हम वही सुनते हैं जो सुनना चाहते हैं! इस प्रकार हम खुद के साथ साथ दूसरों को भी दुःख पहुँचाते हैं और जो रिश्ते बचाये जा सकते थे हम उन्हें आसानी से खो देते हैं! यहाँ कोई किसी की व्याख्या सुनने के लिए तैयार नहीं और सुन भी ले तो समझने के लिए तैयार नहीं! ऐसा लगता है कि किसी को व्याख्या देना अपने समय की बर्बादी है, कम से कम ऐसे लोगों को व्याख्या देना जो समझने के लिए तैयार ही ना हो तो बिलकुल बेकार है! भला कितने लोगों को आप व्याख्या देंगे....कितने लोगों को समझायेंगे! ये देखिये कि अगर सामने वाला आपको ना समझने की कसम खा चुका है तो फिर अपना काम कीजिये क्योंकि आप जबरदस्ती किसी से अपनी बात नहीं मनवा सकते और जबरदस्ती की जरुरत भी क्या है! जबरदस्ती रिश्ते नहीं निभाए जाते; रिश्ते तो दिल से निभाए जाते हैं! रिश्तों में शब्द तो शब्द है खामोशियों को भी समझना होता है; रिश्तों की उम्र उतनी ही लंबी होती जितनी हमारी समझदारी की! कोशिश कीजिये कि एक दूसरे को समझने के लिए सुना जाए; कभी किसी को समझने के लिए सुन कर देखिये शायद नज़ारे बदल जाएं; शायद उम्मीद का वो दीया जो बुझने को है फिर से जलने लगे; शायद दिल के किसी कोने में जहाँ कल तक एक सुकून रहा करता था फिर से वापस आ जाये! जी! समझना एक बहुत बड़ी कला है और आप इसे बखूबी जानते हैं बस एक बार कर के देखिये!"

"मुझे पता है
तुम नहीं समझोगे मुझे
और शायद तुम्हारे बाद भी
मैं बहुत कम समझा जाऊं
पर मेरी मज़बूरी है
कि मैं रुक नहीं सकता
मुझे चलना होगा
चलते रहना होगा
ताकि
जिंदगी के किसी मोड़ पे
जब तुम मिलो मुझे
तो मेरी ख़ामोशी
तुम्हें वो सब कुछ समझा दे
जो आज मेरे शब्द नहीं कर पाएं हैं!"

-शशिष