बस दो पंक्तियाँ---
"तेरी पलकों पे अपना आसमा बिठाने के लिए
मैं तैयार हूँ प्रिय
तेरे क़दमों में अपनी जमीं रख जाने के लिए।"
-शशिष कुमार तिवारी
(12.55am, 17th July 2013 at Patna)
"तेरी पलकों पे अपना आसमा बिठाने के लिए
मैं तैयार हूँ प्रिय
तेरे क़दमों में अपनी जमीं रख जाने के लिए।"
-शशिष कुमार तिवारी
(12.55am, 17th July 2013 at Patna)
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