Wednesday, July 17, 2013

 बस दो पंक्तियाँ---

"तेरी पलकों पे अपना आसमा बिठाने के लिए
मैं तैयार हूँ  प्रिय
तेरे क़दमों में अपनी जमीं रख जाने के लिए।"

-शशिष कुमार तिवारी
(12.55am, 17th July 2013 at Patna)

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