बस दो पंक्तियाँ---
"तुम आते तो मौसम और भी मदहोश हो जाते
थे बेहोश से जो ख्वाब उनमें होश आ जाते ...!"
-शशिष कुमार तिवारी
(12.35pm, 1st July at Patna)
"तुम आते तो मौसम और भी मदहोश हो जाते
थे बेहोश से जो ख्वाब उनमें होश आ जाते ...!"
-शशिष कुमार तिवारी
(12.35pm, 1st July at Patna)
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