बस दो पंक्तियाँ---
"दिल के दरवाजे धक्को से नहीं खुलते
तुम मुस्कुरा दो प्यार से येही हूनर काफी है।"
-शशिष कुमार तिवारी
(1.51pm, 20th July 2013 at Patna)
"दिल के दरवाजे धक्को से नहीं खुलते
तुम मुस्कुरा दो प्यार से येही हूनर काफी है।"
-शशिष कुमार तिवारी
(1.51pm, 20th July 2013 at Patna)
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