बस दो पंक्तियाँ---
"मेरी आँखों में मोहब्बत के अब आँसू नहीं दिखते
लोग मिलते हैं पर अक्सर दिल से नहीं मिलते
बड़ा बेदर्द जमाना है जरा संभल के चलिए
गिरने के बाद अक्सर पहचानने वाले नहीं मिलते।"
-शशिष कुमार तिवारी
(कल शाम पटना में रचित)
"मेरी आँखों में मोहब्बत के अब आँसू नहीं दिखते
लोग मिलते हैं पर अक्सर दिल से नहीं मिलते
बड़ा बेदर्द जमाना है जरा संभल के चलिए
गिरने के बाद अक्सर पहचानने वाले नहीं मिलते।"
-शशिष कुमार तिवारी
(कल शाम पटना में रचित)
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