बस दो पंक्तियाँ---
"कुछ वक्त दो मुझको मैं भी बादल बनूँगा
कुछ वक्त दो मुझको मैं भी बरसूँगा तुमपे
कुछ वक्त दो मुझको मेरे रंगों में खोने का
प्रिय!फिर मैं तेरी दुनिया का इन्द्रधनुष बनूँगा।"
-शशिष कुमार तिवारी
(12.03am, 4th July 2013 at Patna)
"कुछ वक्त दो मुझको मैं भी बादल बनूँगा
कुछ वक्त दो मुझको मैं भी बरसूँगा तुमपे
कुछ वक्त दो मुझको मेरे रंगों में खोने का
प्रिय!फिर मैं तेरी दुनिया का इन्द्रधनुष बनूँगा।"
-शशिष कुमार तिवारी
(12.03am, 4th July 2013 at Patna)
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