Monday, July 8, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"हर हाथ को इक हाथ की जरुरत है 
हर ख्वाब को इक पर की जरुरत है 
जिन्दगी यूहीं यहाँ जिन्दा नहीं रहती 
हर सांस को इक आस की जरुरत है।"

-शशिष कुमार तिवारी 
(4.38pm, 8th July 2013 at Patna)

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