बस दो पंक्तियाँ---
"जमीं को देखकर आसमां का अंदाज़ा न लगा
मेरी फटी कमीज देखकर मेरा तमाशा न बना
है कूबत तो कभी अन्दर आके देख जरा
यूं बाहर से दूर बैठे समंदर का अंदाज़ा न लगा।"
-शशिष कुमार तिवारी
(7.15am, 9th July 2013 at Patna)
"जमीं को देखकर आसमां का अंदाज़ा न लगा
मेरी फटी कमीज देखकर मेरा तमाशा न बना
है कूबत तो कभी अन्दर आके देख जरा
यूं बाहर से दूर बैठे समंदर का अंदाज़ा न लगा।"
-शशिष कुमार तिवारी
(7.15am, 9th July 2013 at Patna)
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