Saturday, January 24, 2015

"इक आग
सबके अंदर है
डर से ढ़की हुई

इक दरिया
सबके अंदर है
बेवजह रुकी हुई

कोई अपने भीतर जाये
तो जागे फिर
सब सोये हैं
बस आँखें हैं खुली हुई

वक्त सबका है जा रहा
सब देखे हैं
पर मानता
जानता कोई नहीं

हैरत है
इंतज़ार लम्बा होता जा रहा
जिंदगी छोटी होते जा रही

ना जाने कब
भोर होगी
कब जागेंगे लोग
भीतर से यहाँ???"

-शशिष कुमार तिवारी
 
"मैं सब से मिल आया
कोई मुश्किल हल न हुई

मैं गर खुद से मिल लेता
तो कोई मुश्किल ही न आती!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"ये भोर
मुझे उम्मीदों
की ओर ले जा रही है

शायद खत्म हो ही जाती है
परेशानियों की रात
ज्ञान की सुबह होते ही!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"एक ख़्वाब तुम्हारी आँखों का
मेरी आँखों के अंदर है
तेरे दिल के धड़कन की
धक धक मेरे अंदर है

मैं कैसे तुझको समझाऊं
तू क्या है मेरे हिस्से में
एक छोटा सा किस्सा तेरा
जीवन बन मेरे अंदर है!!!"

-शशिष कुमार तिवारी

 
"लाओ
अपने आसुंओं को
मुझे दे दो

मेरी आँखों में
अभी कई समंदर
समां सकते हैं!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"मैं खुश रहता हूँ
हथेलियों पे आंसुओं को रख कर भी!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"हां मैं जनता हूँ
कि तुम पढ़ते रहते हो
चोरी चुपके
मेरी कवितायेँ

और ये भी जनता हूँ
कि तुम मेरी फ़िक्र करते हो

और भी बहुत कुछ
मैं जनता हूँ
जो तुम करते हो
पर बताते नहीं
जताते नहीं

और इसीलिए तो
मैं भी बेफिक्र
लिखता रहता हूँ
अपने दिल की बात

क्योकिं मैं जनता हूँ
मेरी बातें मेरी मंजिल तक
पहुँच ही जाती हैं!!!"

-शशिष कुमार तिवारी
 
"तुम भी प्यार न होने का
बहाना करते हो
हम भी अब नहीं मानते
कि हमें इश्क़ है कोई

पर काश कि
बहानों और न मानने से
भावनाएं दफ़्न हो जातीं
और सूख जाते आंसू!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 

Friday, January 23, 2015

"आओ बात करें खामोशियों की हम
और तन्हाइयों को महफ़िल की राह दिखाएँ!"

-शशिष कुमार तिवारी  
"बहुत चाहा था तुम्हें
बहुत कोशिश की थी

बहुत करीब आया था तेरे
बहुत साजिश की थी

हां तुम्हें बताया नहीं था कभी
पर बहुत मोहब्बत की थी

किया था कई बार मैंने
तेरा पीछा भी

कई बार राह पे
घंटों किया था
तेरे गुजरने का इंतज़ार भी

कभी मैं भी
पागल सा था
कभी मैं भी
मोहब्बत सा था

दीवाना था
तुझे देखते रहने का
तेरी तस्वीरों को संजो के रखने का

बिन देखे तुम्हें
मेरी बेचैनियां
थमने का नाम ही नहीं लेती थी

बिन देखे तुम्हें
सूरज चाँद सब अधूरे से लगते थे

मोहब्बत ही थी न
और कौन कर सकता है
इतना पागल मुझको

पर देखो न
अब मैं ना जाने कैसे
जिन्दा हूँ
तुम्हारे बगैर भी

अब मेरी बेचैनियां
ना जाने क्यों इतनी समझदार हो गयीं हैं

अब मेरी साँसें ना जाने क्यों नहीं अटकती
अब मेरी धड़कनों को
ना जाने क्यों नहीं सुनाई देते तुम्हारे पदचाप

पता नहीं
जो कल था वो झूठ था
या जो आज है वो झूठ है

या सब कुछ सही है
बस जिंदगी ने कुछ समझदार होने की
गलती कर दी है

जो भी है
अच्छा है अब

जो भी था
अच्छा था तब

बस यूहीं
यादों के घर में
मेहमान की तरह
आते रहना

और मैं ना मिलूं
तो समझ लेना
तुम्हें खोजने निकला हूँ

या फिर हो गया हूँ
अधिक समझदार
जैसा कि तुम चाहते थे
मुझे हो जाना हर बार

और सुनो
अगर लगे कि
मैं पागल ही अच्छा था
बेवकूफ ही अच्छा था

तो लिख जाना एक खत
और उसमे अपना दिल

छोड़ जाना
मैं जब भी लौटूंगा
पढ़ लूंगा
और
लौटा दूंगा तुम्हें
तुम्हारा शशिष!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"हां इश्क़ की है मैंने भी
मेरा दिल भी दिल है
कोई पत्थर तो नहीं!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
 "जब रात हो जाती है
ना जाने क्यों
दिल से तेरी बात हो जाती है!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"शायद
अब मैं कभी
वापस नहीं लौट पाउँगा

एक काम करो
मुझे बदनाम कर दो
उसकी निगाहों में

मैं उसकी निगाहों में
अपने लिए आंसूं नहीं देख सकता!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"मैं चाहता था
आखिरी बार
बस
कैसे भी
तुमसे एक बार मिलना
और पूछना
बस इतना सा
कि क्यों
तुम गए मुझसे दूर
जबकि
मुश्किल था
तुम्हारी साँसों का भी
मेरी धड़कनों के बगैर 
चलते रहना!

काश कि
तुम एक बार मिल जाते
काश कि 
मरने से पहले ये काश
काश ना रहे!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"रोज
रात को
याद आते हो

रोज सुबह होते ही
भूल जाता हूँ
मैं तुमको

बस इसी कस्मकस में
ना तुम्हें छोड़ पाता हूँ

ना करता हूँ कोशिश
तुम्हें पा लेने की!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"चाहता था सब कुछ कह दूँ
पर फिर रुका
ये सोच कर
कि जितना कहा
उतना ही कम तो न था
जितना न कहा
उतना समझने के लिए!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 
"रात हो गयी है
आओ सो जाएं

कुछ देर ही सही
सपनों में खो जाएं

फिर तो सुबह को होना ही है
सपनों को
हकीकत की भीड़ में खोना ही है

रात हो गयी है
आओ न सो जाएं!!!"

-शशिष कुमार तिवारी
 
"मैंने तुमसे बात करना छोड़ दिया है,
इसका ये मतलब नहीं
कि तुम्हें याद करना छोड़ दिया है!"

-शशिष कुमार तिवारी 

Wednesday, January 21, 2015


"मेरा कहना मान भी ले
वरना ऐ दिल पछतायेगा
वो तो हंस लेंगे जीभर के
तू पानी पानी हो जायेगा!!!"

-शशिष कुमार तिवारी 

"बहुत देर लगी
उनको समझने में
जिन्होंने समझ रक्खा था
नासमझ हमको!!!"

-शशिष कुमार तिवारी  
"कहाँ से लाये हम प्यार की बातें बोलो ,
फायदे की बाजार में प्यार की कोई पूछ नहीं!"

-शशिष कुमार तिवारी