बस दो पंक्तियाँ---
"जब भी आई तू याद प्रिय
नैनों को समझाने में गुजरी रात प्रिय।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.29pm, 7th July 2013 at Patna)
"जब भी आई तू याद प्रिय
नैनों को समझाने में गुजरी रात प्रिय।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.29pm, 7th July 2013 at Patna)
No comments:
Post a Comment