बस दो पंक्तियाँ---
"मुझे अक्सर गुलाबों में काँटे नहीं दिखते
येही कुसूर है मेरा जमानेवाले कहते हैं।"
-शशिष कुमार तिवारी
(कल शाम रचित, पटना में)
"मुझे अक्सर गुलाबों में काँटे नहीं दिखते
येही कुसूर है मेरा जमानेवाले कहते हैं।"
-शशिष कुमार तिवारी
(कल शाम रचित, पटना में)
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