Saturday, July 6, 2013

बस दो पंक्तियाँ---

बस दो पंक्तियाँ---

"मुझे अक्सर गुलाबों में काँटे नहीं दिखते
येही कुसूर है मेरा जमानेवाले कहते हैं।"

-शशिष कुमार तिवारी
(कल शाम रचित, पटना में)

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