Friday, May 29, 2009

"मेरे अतीत तुम कहाँ हो "

वो वक़्त क्या जब तेरी याद न आए
वो  बात क्या जिसमे तेरी बात न आए
समय से दूर तुम छूटे न जाने कहा हो
किसी की आगोश में खोये न जाने कहा हो

क्या पुछू तुम्हारा पता  इन वादियों से मैं 
डरता हूँ कि फिर से खामोशियाँ न हो 
पर मिलोगे जब कभी तुम मेरे वर्तमान से
ये तुमसे पुछ बैठेगा इक प्रश्न बड़े अभिमान से

----"बताओ तुम्हारा अतीत कहा है"
और फ़िर तुम  शुन्य से हो जाओगे  मानो अपने ज्ञान से 
और उस शुन्य से उठेंगे पूछते कुछ स्वर 
...." मेरे अतीत तुम कहा हो , मेरे अतीत तुम कहा हो ???"