Tuesday, April 15, 2014

"जो कुछ भी हो तुमसे बात करनी है
एक बार ही सही मुलाकात करनी है
फिर नहीं रहेगा गम इस दिल में कोई
बस एक बार तेरे दिल की तहकीकात करनी है!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 9.04pm, Kota) 

Monday, April 14, 2014

"दिल में आती है जो वही बात करते हैं 
इस तरह हम रोज कई करामात करते हैं 

लोग क्या सोचेंगे हमें देख कर आखिर 
ऐसे सवाल अक्सर हमपे आघात करते हैं 

तोड़ के बंदिशों को उनसे मिलने की जिद में
रोज कई मुश्किलों से हम मुलाकात करते हैं  

डरते नहीं हैं इश्क़े जहां में रहने वाले 
अपनी दीवानगी से वो खुदा को साथ करते हैं 

कौन चाहता है अश्कों को जुदा करना यहाँ 
ये खेल तो सारे दिल के  ज़ज्बात करते हैं 

दिल में आती है जो वही बात करते हैं..... "

-शशिष कुमार तिवारी 
(15th April 2014, 11.44am, Kota)







बस दो पंक्तियाँ---

"अब क्या दिखाएं इश्क़ की चिंगारियां तुमको,
पास आओ तो आग का पता चल जायेगा!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 5.34am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"सारी रात जब तन्हाइयों को लिखा मैंने,
महफ़िलें वाह वाह कहके झूमने लगीं!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 5.29am, Kota)

बस दो पंक्तियाँ---

"बहुत दूर तक फैलता खबर रहा,
उसकी नज़रो में खुदा का असर रहा!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 5.25am, Kota)
---पर---

"तुम टूट जाओ
हम टूट जाएं
पर उम्मीद
नहीं टूटनी चाहिए!

तुम छूट जाओ
हम छूट जाएं
पर रिश्तें
नहीं छूटने चाहिए!

तुम रूठ जाओ
हम रूठ जाएं
पर विश्वास
नहीं रूठना चाहिए!

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 5.10am, Kota)

"दुवाएं साथ देती हैं,
तो खतायें असर नहीं करतीं!"

-शशिष कुमार तिवारी 
बस दो पंक्तियाँ---

"तोड़ कर रिश्ता तुमसे कहा तक जायेंगे,
पंक्षी हैं शाम तक घोसलों में लौट ही आएंगे!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 4.46am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"साथ निभाना है तेरा उम्र भर के लिए,
चंद लम्हों की खता को भूला दे प्रिय!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 4.37am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"जैसे जैसे सफर पुराना हो रहा है,
मैंने देखा वो मेरा दीवाना हो रहा है!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 4.32am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"वक्त आएगा तो हर इम्तहां देंगे ,
जा कह दे आँधियों से हम तैयार बैठें हैं!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 4.27am, Kota)

पहली बार हाइकू लिखने का प्रयास---

---ख़्वाब---

ख़्वाब सजाया
जिस दिन तुम्हारा
जीवन पाया

स्वप्न टूटते
फिर भी न हाराते
पग बढ़ते

सपने सारे
कभी पुरे न होते
दिल के मेरे

स्वप्न है उड़ें 
नीले आसमान में 
चिड़िया जैसे 

सपने जागें
नींद उड़ी फिर से
आँखों की मेरी

जिंदगी देखी
सपनों में तुम्हारें
जन्नत लगी

सपने तेरे
सच होंगे जरुर
विश्वास कर

ख्वाब देखने
जब कभी निकला
देखा तुमको

प्यार तुम्हारा
ख़्वाब इस दिल का
देदो अब तो

प्यार ये मेरा
तुम्हें जरूर देगा
स्वप्न हज़ार

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 3.52am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"जिस हंसी रात में तुझको देखा था,
उस हंसी रात ने मुझे रौशनी दी है!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 3.08am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"परिंदे आसमा में बहुत जहर फैले हैं,
पिंजड़े में ही जान सलामत है तेरी!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 2.53am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"आहिस्ता आहिस्ता सब कुछ तेरे नाम कर दिया,
बस इतनी सी बात के लिए दुनिया ने बदनाम कर दिया!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 2.46am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"जब तुम्हें अपना इश्क़ मिल जायेगा,
देखना फिर तुम्हें खुदा नज़र आएगा!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 2.40am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"तेरे क़दमों में जब आसमां लिखा मैंने,
इश्क़ के नीचे खुदा लिखा मैंने!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 2.34am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"तुमको पाने की जिद ऐसी है ,
मुझको लेके डूब जाएगी इक दिन ये!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 2.27am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"हर तरफ प्यार जैसा दिखता है,
जब से तेरी आँखों में हमने देखा है!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 2.22am, Kota)
बस दो पंक्तियाँ---

"जहां तक प्यार देखा है,
वहां तक प्यार सींचा है!"

-शशिष कुमार तिवारी

बस दो पंक्तियाँ---

"अंधेरों ने रौशनी का कारोबार कर लिया है,
उजालों अब तो जागो कि शर्मशार कर दिया है!"

-शशिष कुमार तिवारी 
बस दो पंक्तियाँ---

"तेरी आँखों में इश्क़ का संसार देखा है,
तुझमें रब तुझी में मैंने यार देखा है !"

-शशिष कुमार तिवारी