Wednesday, May 6, 2015

"सपनों को छोटा करने से 
खुश होने की उम्मीद न कर 
जो सच में खुश तुझे होना है 
अपने ऊपर विश्वास तू कर!"

-शशिष 
 
"कुछ बातों को याद रखा कर
तू मुझको जिन्दा साथ रखा कर
चाहे तू जाए जहां कही पर
मेरी यादों को अपने पास रखा कर!

कुछ बातों को याद रखा कर.....!"

-शशिष@4.47pm


"कभी तू दिन कर लेता है
कभी तू रात कर लेता है
तुझे जो अच्छा लगता है
वही हर बात कर लेता है

ऐसे गुरूर में तू मत रहा कर
तू जानता नहीं खुदा को मेरे
जिसे वो आसमा करता है
उसी को ख़ाक कर देता है!!!"

-शशिष



(1.)

"हजार परेशानियां
साजिश करके
एक साथ लगी हैं
वर्षों से इसे थोड़ देने पे
पर ये अकेली
मेरी उम्मीद है कि
टूटती ही नहीं!"

(2.)

"हजार दुःख हैं
ऐसा नहीं
कि केवल खुश हूँ मैं
पर जब कभी हौले से भी
मेरे हौसले की हवा चलती है
सारे दुःख झर जाते हैं
पतझड़ के पत्तों की तरह!"

(3.)

"क़र्ज़?
हाँ हैं!
बहुत हैं.…
पर जितने भी हैं
ख्वाबों के तिनके में भी नहीं!"

(4.)

"मंजिल दूर है
पर
ख़ुशी इस बात की है
कि है
आगे इसी रस्ते पर!"

-शशिष@4.04pm


"गर मोहब्बत जुर्म है तो हमें भी गुनहगार रहने दीजिये
हमें हर सजा क़ुबूल है इस जुर्म के लिए!!!"

-शशिष@3.55pm
"मैं मोहब्बत करूँ
मेरा कुसूर
तुम मोहब्बत करो
तुम्हारा कुसूर
पर
हम दोनों मोहब्बत करें
एक दूसरे से
फिर तो ज़माने की नज़र में
ये जुर्म है यारों!"

-शशिष@1.55pm


"मेरे बेगैर जीने का इक बार तू फैसला कर के तो देख
सांसें थम ना जाएं एक पल के लिए तो वो मोहब्बत नहीं मेरी!"

-शशिष@1.45pm


"मेरे प्यार के कई मंज़र हैं
तुम्हारी आँखों में
मैंने देखा है,
ग़मों के भी,
कई समंदर हैं तुम्हारी आँखों में

तुम मुझसे भी नहीं बताते हो
राजे दिल कभी कभी
मैंने अपना आईना सा,
देखा है तुम्हारी आँखों में

तुम भी न जाने कितने
ख्वाब छुपा के बैठे हो
रात परेशान है,
कि नींद,
मिलती नहीं है तुम्हारी आँखों में

एक छोटा सा सवाल है
कहो तो कर लूँ प्रिय
क्या मेरा सच में
कोई घर है तुम्हारी आँखों में???"

-शशिष@1.16pm

Tuesday, May 5, 2015

"कई बातों का जवाब नहीं मिल पाता है
पास रह के प्यार का हिसाब नहीं मिल पाता है

जमीं से कह दो कि उसके बिन यहाँ
आसमां का कोई मिज़ाज नहीं मिल पाता है

अँधेरा जब फैलता है शहर के गलियारों में
ढूढ़ने से भी कोई आफ़ताब नहीं मिल पाता है

दरियाओं को समंदर पी के साफ़ कर देती है
नारे लगते हैं पर कोई इंकलाब नहीं मिल पाता है

अच्छा है प्यार मोहब्बत जवानी के लिए
बूढ़े शज़र को कोई ख़्वाब नहीं मिल पाता है

और गर जीना ही है तो मस्ती में जीया कर
यहाँ उदासियों को कोई इंसाफ नहीं मिल पाता है!"

-शशिष@3.16am

 
"मेरी एक छोटी सी विनती है प्रिय
जब भी बिन बताये जाया करो
मेरी साँसें भी साथ ले जाया करो!"

-शशिष@12.58am
"मौत से तो कुछ नहीं होगा
तेरी खामोशियाँ ही एक दिन
जान लेंगी मेरा!!!"

-शशिष@9.25pm
"शायद वो अभी तक ठीक नहीं है,
शायद दिल अभी भी उनका कोई ज़ख्म पाले बैठा है,
शायद अभी भी कोई बात है कि वो आ रहे हैं जा रहे हैं,
पर ठहर नहीं रहे दो पल के लिए भी,
शायद कोई खता हमसे हुई है ,
शायद हम अभी तक माफ़ नहीं हुए हैं,
शायद कुछ राज है  जो वो खोलना नहीं  चाहते,
शायद कोई छोटी सी ही पर बड़ी बात है,
जो वो बोलना नहीं चाहते,
शायद उस रात कुछ अफवाहों के बादल ने,
ऐसे ढक लिया हो चाँद को कि वो निकलता तो है,
 पर अब दिखता नहीं,
शायद आँखों की दरिया में कुछ हुआ है,
कि दिल की लहरें बिलकुल शांत हो गयी हैं,
खामोशियाँ पसर गयी हैं जिंदगी के किनारे पे,
धूल जले जा रहे हैं.....
मरे जा रहे हैं प्यास से,
शायद अभी और इन्हें मरना है,
शायद अभी और इंतज़ार बाकी है किस्मत में,
शायद खुदा ने मंजिल जिंदगी के आखिरी पन्ने पे लिखी है ,
शायद अभी और दुःख के पन्ने पलटने हैं ,
शायद वो अभी बहुत दूर हैं हमसे,
कोई तो बात है कि आज कल वो शबनम की बूँद की तरह,
 फिसल जाते हैं दिल की दूभ पे गिरते ही,
शायद उन्हें मैं परेशान कर रहा हूँ,
शायद वो मुझे परेशान कर रहे हैं,
शायद वो खामोशियों में कुछ कह रहे हैं,
शायद मैं शब्दों में सुनना चाहता हूँ,
शायद तन्हाइयाँ एक लम्बा सागर हैं,
अभी और वक्त लगेगा इसे पार करने में ,
शायद वो उस पार बैठे हों तन्हाई के ,
शायद हम इस पार तलाश कर रहे हैं उन्हें ..,
शायद वो अगली बार जब मिले तो रुके कुछ देर ,
शायद वो केवल इसे पढ़े नहीं,
शायद वो इस बार कुछ समझे भी,
मुझे नासमझ बोलते हैं वो,
खुद बहुत बच्चे हैं अभी ,
शायद अब वो कुछ बड़े बने,
शायद अब वो हमें सुना करे समझा करे ,
शायद ये शायद दूर हो अब,
और वो आये ठहरे और कुछ बात बने.…
शायद !!!!"

-शशिष@4.58pm

Monday, May 4, 2015

"तेरे आने से पहले तेरी आहट जान लेते हैं
शब के अंधेरे में भी तुझे हम पहचान लेते हैं

तू चाहे तो कभी आज़मा के देख ले हमको
तेरी उफ़ की खातिर हम अपनी जान देते हैं

सबकुछ पा कर भी जब सुकूं नहीं मिलता है हमें
तन्हाई में तेरी यादों की चादर हम तान लेते हैं

जब नभ में नहीं दिखता है हमें चाँद कभी
हम मेघ के आगोश में खोया उसे मान लेते हैं!

तेरे आने से पहले तेरी आहट जान लेते हैं....!"

-शशिष@2.49am

"एक और एक जुड़े
तो सारा जग बन जाता है
जो दो से कोई एक हटे
सारा जग सूना हो जाता है!"

-शशिष 
"प्रिय तुम उदास ना रहा करो
मुझे अच्छा नहीं लगता
उदास तुम होते हो उधर
इधर मेरी खुशियां दम तोड़ती हैं

तुम्हारी तबस्सुम से
जिन्दा है मुस्कराहट मेरी
इस बात को भूल ना जाया करो
प्रिय तुम उदास ना रहा करो

कोई परेशानी हो
तो बताया करो
कोई दुःख हो
तो जताया करो
तुम कम से कम
मुझसे तो कुछ ना छुपाया करो
पास रहो या दूर रहा करो
पर प्रिय
तुम उदास ना रहा करो
तुम उदास ना रहा करो!!!"

-शशिष@8.58pm
"तुम खुश नहीं
तो मेरी भी सारी खुशियां 
नाराज़ हैं मुझसे!"

-शशिष@8.43pm
"प्रिय तुमने
रुलाया है आज मुझे
शुक्रिया इसके लिए!
अरसों बाद मैं रोया हूँ इस कदर
मुझे अच्छा लग रहा है 
रोना तुम्हारे लिए!

काफी अच्छा
महसूस कर रहा हूँ
मैं तुम्हारे इंतज़ार में
पल पल मर रहा हूँ
प्रिय ऐसे ही मारो मुझे
ऐसे ही दुःख दो मुझे
मैं कुछ नहीं बोलूंगा तुम्हें
ऐसे ही नज़रअंदाज़ करो मुझे
वैसे भी
मैं कौन हूँ तुम्हारे लिए
प्रिय तुमने
रुलाया है आज मुझे
शुक्रिया इसके लिए!

मैं यहाँ इस ओर
तब तक इंतज़ार करूँगा
जब तक कि
तुम आ ना जाओ
या फिर
जब तक ये कमबख्त साँसें
मेरा पीछा ना छोड़ दें

अजीब सा लग रहा है
जितनी बार ये साँसें आ जा रहीं हैं
ऐसा लग रहा है
उतनी बार मेरी मौत हो रही है
मैं चाहता हूँ बस एक बार मरना
प्रिय ये बार बार मरना
मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा

तुम चाहे जहाँ भी हो
जिस काम में हो
प्लीज् आ जाओ
मुझे बचा लो
ये साँसें मार रहीं हैं मुझे
ये आंसू डुबो रहे हैं मुझे
मुझे एक अजीब सी घुटन हो रही है
मेरा दम निकला जा रहा है
आ जाओ ना

क्या मेरी जिंदगी
तुम्हारे किसी काम की नहीं
क्या मेरा होना
कोई अर्थ नहीं रखता तुम्हारे लिए
क्या मेरे दुःख
तुम्हें थोड़ा भी नहीं सताते
क्या मेरे ये आंसू
महज  पानी की बूँदें हैं तुम्हारे लिए
क्या मेरी मुस्कराहट का
मेरी ख़ुशी का
कोई महत्त्व नहीं तुम्हारे लिए???

प्रिय आओ एक बार
और दे दो इन सवालों के जवाब तुम
मुझे मरने का कोई डर नहीं
पर मैं सुकून से मरना चाहता हूँ
इक सुकून भरी जिंदगी के लिए न सही
एक सुकून भरी मौत के लिए ही सही
प्रिय आओ
आओ जाओ तुम!"

-शशिष@8.08pm

Sunday, May 3, 2015

"आज कोई पास होकर भी
नहीं है मेरे पास
उदास है उसका मन शायद
शायद कुछ हुआ है
जो उसके मन का नहीं

और अफ़सोस है मुझे
कि मैं चाहते हुए भी
कुछ नहीं कर सकता
मैं उसका मन नहीं बदल सकता

आज महसूस हुआ है मुझे
अपने कमजोर होने का
वक्त आज भी मुझपे भारी रहा
वक्त ने आज फिर ये दिखाया
कि मेरे होने न होने से कुछ नहीं होता
कि जब वो ठीक होता है
तभी चलती है मेरी
वरना मेरे मुस्कुराने से
कोई मुस्कुरा नहीं लेता

आज कोई पास होकर भी
नहीं है मेरे पास
ऐ वक्त तू उसके हिस्से की
तमाम परेशानियां, दुःख दर्द
मेरे नाम लिख दे
मैं उफ़ तक नहीं बोलूंगा
मुझे लाख परेशानियां, दर्द, ज़ख्म,
सब क़ुबूल हैं
पर मुझे बिलकुल क़ुबूल नहीं
पास होकर भी उसका
पास ना होना मुझसे!!!"

-शशिष@11.51pm
 
"तू परेशां है
तो मुझे भी सुकूं नहीं!"

-शशिष@11.20pm
"तुम उदास हुए तो
फिजाओं का मुस्कुराना मुश्किल है

तुम खामोश हुए तो
बहारों का गुनगुनाना मुश्किल है!

हंस भी तो अब
चलो छोड़ो
गुस्सा फेंक भी दो अब

वरना पता है तुम्हें क्या होगा
कुछ पल में आँखों से बरसात होगी
और दिल मेरा भींगा होगा!!!"

-शशिष@10.36pm
 
"मुझे जिंदगी से बेदखल करते
तो उफ़ तक नहीं होती
जो दिल से बेघर करोगे
तो हंगामा तो मचेगा ही!!!"

-शशिष 
"तेरी ख़ताएँ भी खूबसूरत लगती हैं अब
कुसूर मेरा नहीं है ये, मेरी  मोहब्बत का है!"

-शशिष 

Saturday, May 2, 2015

"तुम्हें फूलों सा खूबसूरत कहूँ
तो भी कम होगा
तुम खुदा का बनाया हुआ
सबसे हसीन तौफा हो!!!"

-शशिष 
"तुम नहीं जानते 
तुम क्या हो मेरे लिए 
और मुझे भी 
बताना कहा आता है प्रिय 
 
कई बार सोचा 
कि तुम्हें क्या कहूँ 
अपना दिल कहूँ 
अपनी साँसें कहूँ 
या कहूँ अपनी जिंदगी मैं 
 
पर प्रिय ना जाने क्यों 
सबकुछ कहने के बाद भी 
कुछ कम सा लगता है 
लगता है कुछ छूट गया 
लगता है काश कि 
कुछ और भी कह पाता मैं तुम्हें 
पर नहीं हो पाता 
प्रिय शब्दों में नहीं समेट पाता मैं तुम्हें  
 
प्रिय तुम मेरे लिए 
एक ऐसी अद्भुत भावना हो 
जो शब्दों से परे है 
जो बस मैं और मेरा दिल महसूस कर सकते हैं 
एक अजीब सा खूबसूरत 
ना जाने कहां से आया एहसास हो तुम 
प्रिय तुम्हें कैसे बताऊँ मैं 
मेरी जिंदगी में 
सबसे अधिक ख़ास हो तुम 
सबसे अधिक खास हो तुम!!!"
 
-शशिष कुमार तिवारी 
(11.32am, 3rd May 2015, Delhi) 

"एक अरसा लगा था उनके दिल में घर करने में 
एक हल्की सी शक की हवा आई और बेघर हो गए!"

-शशिष@9.28am
"तमाम दुनिया की दौलते
कुछ नहीं हैं मेरी मिट्टी के सामने!"

-शशिष@1.35am
"मेरे लिए मेरी मिट्टी ही इतनी अहम थी
कि तमाम खजाने दुनिया के ठुकरा आया मैं!"

-शशिष@1.10am
"लोग पूछते हैं मुझसे
कि कौन है छुपा छुपा सा
मेरी कविताओं में
मेरी ग़ज़लों में
मेरी शायरिओं में
अब क्या कहूँ उनसे
कि एक कल्पना है छुपी हुई
हकीकत बनके
और एक हकीकत है छुपी हुई
कल्पना बनके!!!"

-शशिष@12.25am
"ऐसा लगता है
कि तुझसे कोई रिश्ता
पुराना है मेरा
वरना चंद लम्हों में
दो निगाहों का मिलना तो मुमकिन है
पर मुमकिन नहीं है
मिलना दो रूह का प्रिय!!!"

-शशिष@11.08pm


"तुम बस लौट आने का
वादा करो
तो हम सदियों तक
मुस्कुरा के इंतज़ार कर लेंगे!!!"

-शशिष@10.48pm
"कोई खेल रहा है मेरे दिल से
बच्चों की तरह
और मैं भी उफ़ तक नहीं कर रहा
माँ की तरह!!!"

-शशिष@10.29pm
"ना झूठ बोलना आता है उन्हें
ना सच कभी बोलते हैं वो
उनके बहानें भी
बिलकुल उनके जैसे हैं
सीधे साधे
छोटे प्यारे बच्चे की तरह!!!"

-शशिष@9.22pm
"एक झलक अपनी दिखा दीजिये
फिर चाहे मौत की सजा दीजिये!

हम नहीं बोलेंगे कुछ भी आपको
आइये दिल में आग लगा दीजिये!

बहुत अरसों से बरसात नहीं आई
आइये हमें फिर से रुला दीजिये!

अब सारे दर्द बहुत पुराने लगते हैं
देखिये इधर,फिर से मुस्कुरा दीजिये!

-शशिष@8.56pm
सुनो प्रिय

"मुझे तुमसे
कुछ जरुरी बात कहनी है
सुनो प्रिय 
देखो जब कभी ऐसा लगे कि
मैं नाराज़ हूँ तुमसे
तो गुस्सा मत होना तुम
रूठ ना जाना तुम
याद रखना
मेरी नाराज़गी की उम्र
पल दो पल से
कभी अधिक नहीं होती
तुम्हारे लिए

तुम मनाओ या मनाओ
प्रिय मैं खुद मान जाऊँगा
मैं सबके जैसा नहीं हूँ
मैं ये नहीं सोचूंगा कि तुम झुको
बल्कि तुम्हारे झुकने से पहले
मैं खुद झुक जाऊंगा
प्रिय मैं खुद मान जाऊंगा

प्रिय मैं जब भी कहूँ कभी तुमसे
कि दूर चले जाओ मुझसे
तब तुम समझना प्रिय
मैं बिलकुल नहीं चाहता
एक पल को भी दूर होना तुमसे
उस पल कभी तुम
मत छोड़ना मुझे
प्रिय आगे मत बढ़ जाना
तन्हा छोड़ के मुझे

प्रिय मैं जब भी कहूँ कभी तुमसे
कि मैं जा रहा हूँ
अब नहीं मिलूंगा तुमसे
तो तुम चाहे तो पुकारना मुझे
या ना पुकारना मुझे
हां पर इंतज़ार जरूर करना
याद रखना
मैं अधिक देर तक
तुमसे दूर नहीं रह पाउँगा
रो लूंगा कहीं किसी तन्हाई में जीभर के
और कुछ लम्हों में ही
तुम्हारी बाहों में फिर लौट आऊंगा

बस चले मत जाना
ठहरे रहना
प्रिय मैं वक्त नहीं हूँ
कि एक बार चला जाऊं
तो लौट के ना आऊं

पर सुनो ना प्रिय
तुम इतना भी मेरे सब्र का
इन्तहां मत लिया करना
यूँ खामोश मत रहा करना
मेरी बातों का जवाब देना
हमेशा चुप मत रहा करना

बस तुम खामोश रहते हो
तो मुझे अच्छा नहीं लगता
प्रिय बात करते रहना
मुझे चुपके चुपके देखना जरूर
पर कभी नज़रें भी साथ करते करना

लेकिन इन सब के बावजूद
प्रिय मुझे जो तुमसे
सबसे बड़ी बात कहनी है
कि तुम जैसे भी हो
मुझे प्रिय हो
बहुत प्रिय हो
तुम ऐसे ही रहना
कभी बदलना मत
प्रिय कभी बदलना मत!!!"

-शशिष@3.48pm

Friday, May 1, 2015

"तुमने जितनी मोहब्बत नहीं देखी अभी तक
उससे अधिक तो हम लूटा के बैठे हैं!
तुम क्या सुनाओगे किस्से दर्द के हमें
तुमने जितने पढ़े नहीं किस्से आज तक
उससे अधिक तो हम बिता के बैठे हैं!!!"

-शशिष@11.14am
"कल जहां थे 
आज वही पे आ गए 
वो ख्वाब से आगे न बढ़ें 
हम हकीकत से पीछे न हटे!"

-शशिष@2.28am
"अब सोचते हैं कि सोचना छोड़ दें
या तो पा लें उसको या जीना छोड़ दें!"

-शशिष@1.35am
"बहुत अरसो से वो गायब हैं
कोई तो हवा चले
कि उनका कुछ पता चले!!!"

-शशिष@1.01am
"यहाँ सांस अटक जाती है
तेरे ओझल होने भर से
और तू कहती है कि
यहीं तो थे
परेशान क्यों हो?!!!"

-शशिष@12.31am 
"जुगनू सी अदा वो अपनी नहीं छोड़ेंगे
 मुझे पता है वो मुझे हंसता नहीं छोड़ेंगे!!!"

-शशिष@11.40pm
"तुम खामोश रहोगे
तो आंधियां तो दिल में आनी हैं
अब इसमें मेरा कोई कुसूर नहीं
तुम दूर रहोगे
तो बेताबियाँ तो दिल में समानी हैं!"

-शशिष@10.10pm 
"वो मुझसे पूछते हैं
कि परेशान क्यों हो?
क्या मैं पूछूं उनसे
कि इतने नादान क्यों हो?!"

-शशिष@10.06pm
"जो तुमको देखा नहीं एक अरसे से
तो निगाहें अपना नूर खो बैठीं हैं
ये केवल दिल का कुसूर नहीं है प्रिय
मेरी तो रूह तक अपना सुकून खो बैठी है!"

-शशिष@9.43pm
"आ जाओ
वरना फिर रो देंगे हम
तुम्हें खोकर
खुद को खो देंगे हम
आ जाओ वरना फिर रो देंगे हम

बहुत मुश्किल से
बहुत अरसों बाद
मुझे मिले हो तुम
तुम ना आये
तो सारी खुशियां खो देंगे हम
आ जाओ वरना फिर रो देंगे हम

गलतियां फिर नहीं करेंगे
ऐसा कैसे कहें तुमसे
खता होगी हमसे
होती रहेगी
तुम्हें माफ़ करना होगा
मुझे बच्चों सा सम्भालना होगा
मेरे जैसे तुम भी हुए तो
ये जिंदगी ही खो देंगे हम
आ जाओ वरना रो देंगे हम

मैं जितनी बार कहता हूँ
कि जाओ अब नहीं मिलूंगा तुमसे
जाओ अब जा रहा हूँ दूर तुमसे
ना जाने क्यों उतना ही
तुम्हारे करीब आने लगता हूँ मैं
ना जाने क्यों उतना ही
तुम्हें सोचने लगता हूँ मैं
जो दूर गए तुम हमसे
तो सारी उम्मीदें ही खो देंगे हम
आ जाओ
आओ ना
आ भी जाओ
अब तो आ जाओ
कितना सताओगे
कब से रो रहा हूँ
और कितना झूठ बोलूं कि रो देंगे हम
रो रहे हैं कब से
आओ
आसुंओं को पोंछ दो तुम
आओ कोई सजा दो मुझे
पर थोड़ा सा ही सही
प्रिय हंसा दो मुझे
प्रिय हंसा दो मुझे!!!"

-शशिष@8.20pm