" ग़ज़ल "
हजारों फासले कर के पार
तोह से मिलने आ गए
तुम्ही दिल तुम्ही हो जान
ये कहने आ गए
हजारों फासले कर के पार ......
न सोचा हमने क्या होगा
न सोचा हम कहा होंगे
तेरा दीदार करने को
सबो को छोड़ आ बैठे
हजारों फासले कर के पार ......
न पूछा हमने जमाने से
न तोह से हम पूछ ही पाए
तेरी आँखों में मोहब्बत है
या नहीं ये पढने आ गए
हजारों फासले कर के पार ......
नहीं है वक्त ऐ साथी
जरा सा वक्त दे दे तू
मैं भी कलि से फूल बन जाऊ
जरा सी अपनी छुवन दे तू
मुझे समां ले साँसों में
बयाँ ये करने आ गए
हजारों फासले कर के पार
तोह से मिलने आ गए .......
हजारों फासले कर के पार
तोह से मिलने आ गए
तुम्ही दिल तुम्ही हो जान
ये कहने आ गए
हजारों फासले कर के पार ......
न सोचा हमने क्या होगा
न सोचा हम कहा होंगे
तेरा दीदार करने को
सबो को छोड़ आ बैठे
हजारों फासले कर के पार ......
न पूछा हमने जमाने से
न तोह से हम पूछ ही पाए
तेरी आँखों में मोहब्बत है
या नहीं ये पढने आ गए
हजारों फासले कर के पार ......
नहीं है वक्त ऐ साथी
जरा सा वक्त दे दे तू
मैं भी कलि से फूल बन जाऊ
जरा सी अपनी छुवन दे तू
मुझे समां ले साँसों में
बयाँ ये करने आ गए
हजारों फासले कर के पार
तोह से मिलने आ गए .......