Thursday, December 27, 2012

" ग़ज़ल "

हजारों फासले कर के पार
तोह से मिलने आ गए

तुम्ही दिल तुम्ही हो जान
ये कहने आ गए
हजारों फासले कर के पार ......

न सोचा हमने क्या होगा
न सोचा हम कहा होंगे

तेरा दीदार करने को
सबो को छोड़ आ बैठे
 हजारों फासले कर के पार ......

न पूछा हमने जमाने से
न तोह से हम पूछ ही पाए

तेरी आँखों में मोहब्बत है
या नहीं ये पढने आ गए
हजारों फासले कर के पार ......

नहीं है वक्त ऐ साथी
जरा सा वक्त दे दे तू

मैं भी कलि से फूल बन जाऊ
जरा सी अपनी छुवन दे तू

मुझे समां ले साँसों में
बयाँ ये करने आ गए
हजारों फासले कर के पार
तोह से मिलने आ गए .......