Tuesday, September 20, 2016

"खुद को खुद से जगाना पड़ता है
यहाँ बहुत कुछ हंस के छिपाना पड़ता है
यूँ तो कहने को सब अपने हैं यहाँ
पर इस सफर में बहुतों को आजमाना पड़ता है!"

-शशिष 

Monday, September 19, 2016

"बार बार धमकी देते हो
अरे गीदड़ों तुम्हें पता है कि हम माफ़ कर देंगे
पर क्या नहीं पता तुमको ये बात
कि जरा सा भी ये मूड बिगड़ा
तो तुम्हें तुम्हारे खिलौने के साथ साफ़ कर देंगे!!!"

*खिलौना- एटम बम ऑफ़ पाकिस्तान

-शशिष

Monday, September 12, 2016

"है तुम्हारा इंतज़ार मुझे
क्या ये बात पता है तुम्हें?
अगर हाँ
तो ठीक है तुम्हें जितना मन
मुझे इंतज़ार कराओ
मैं थकूंगा नहीं तुम्हारा इंतज़ार करने में
प्रिय बस मैं चाहता हूँ
तुम्हें ये एहसास दिलाते रहना
कि मैं बैठा हूँ यहाँ
तुम्हारे इंतज़ार में
खुद भी इक इंतज़ार बनके!"