Thursday, June 21, 2012

एक सपना है कि
तू सपना न रहे

तू हो जहाँ भी

सलामत हो
संग तेरे कोई गम न रहे 

एक सपना है कि
तू सपना न रहे

तेरी हर ख्वाहिशे
पूरी हो
कुछ अधुरा न रहे
आसमा चूमे तेरे कदम
बिन तेरे कुछ पूरा न रहे

एक सपना है कि
तू सपना न रहे

जहा तक दे सकू तेरा साथ
वो अंतिम सांस हो
मझधार में छोड़ दे साथ
नदी में वो नाव न रहे
आखरी मंजिल तक कदम तेरे साथ हों
या तो फिर ये पैर न रहें 

एक सपना है कि
तू सपना न रहे 
इक अजनबी सा इश्क उनसे हुआ क्यों है
दिल इस कदर उनसे मेरा लगा क्यों है

जब कुछ नही है इश्क सा उनके दिल में
फिर ये दिल उस दिल से इतना जुड़ा क्यों है

न जाने वक्त कहा ले के जायेगा इस रिश्ते को
इश्क के रिश्तों के रास्ते पे इतना धुआ क्यों है

न जाने हम मिले न मिले इस जनम में कभी
पर उसका न होना भी न जाने इश्क का होना क्यों है  

Tuesday, June 19, 2012

इश्क़  का क्या न जाने कब किस से हो जाये
दिल का क्या न जाने कब कहा खो जाये
कितना संभाल के चले अपनी निगाहों को
इन निगाहों का क्या कब किसमे खो जाये 
बोल प्रिय !!!


कैसा दिखता हूँ बोल प्रिय
मैं तुझे तेरी यादों में
तू भूल गई या फिर याद तुझे है
जो कुछ बोला था
तुने अपनी बातों में


वो वादे  जो किये थे तुने
बोल प्रिय तू कितना निभा पाई
कहा था छोड़ने को सबकुछ तुने
तो फिर वापस मुड़  के क्यों न आई 


मैं करता रहा इंतज़ार तेरा
अपने हर दिन और हर रातों में
प्रिय !
मैं लेता रहा बस एक नाम तेरा
कभी यादों में कभी बातों में


न जाने क्या रही तेरी मज़बूरी
जो तुने ऐसा मेरे साथ किया
कभी मुझ बिन
तू इक पल न जी पाई
प्रिय !
फिर कैसे रिश्ता तुने काट दिया


अब खोजू मैं तेरा एहसास प्रिय
अपने हर रिश्ते और नातो में 
कैसा दिखता हूँ बोल प्रिय
मैं तुझे तेरी यादों में...???
                                     -शशिष कुमार तिवारी