Tuesday, May 24, 2011

ख़ुशी 

हम असफल सही 
बेईमान तो नहीं है. 
पैसा 

बहुत खूब हो तुम 
क्या बात है तुम में 
तुम रिश्तो से भी बड़े हो आज 
तुम इंसानों से भी खास हो आज 
तुम्हें जिसने बनाया 
भला उसी को कैसे फंसा दिया तुमने 
अपने मायाजाल में ???
"अन्तःस्वर "

न हकीकत ही सही है 
न सही कोई सपना है 
अब कैसे कहे कि कौन अपना है  

अजब सी जिन्दगी है 
अजब सा द्वंद है 
हुए अपने पराये 
ये पैसा भी क्या चीज है 

ये युग कौन सा है 
कि केवल स्वार्थ ही सबके दिल में बसा है 
कि आदमी के कितने रंग हैं आज 
भला ये किससे छुपा है

बदलना वक्त को खुद से पहले 
बड़ा मुश्किल है अब 
जीना ये जिन्दगी दूसरों की दिशा में 
बड़ा मुश्किल है अब 

वही करना है जो 
दिल चाहता है 
ये उपर वाला भी 
कहाँ दुबारा जिन्दगी बांटता है!!!


धोखा 

मुझसे 
कहा था उसने 
कि
वो नहीं देगा 
मुझे धोखा 
ताउम्र!!!
"फिर से एक नई शुरुवात करेंगे"

ये कसम खाते हैं 
कि तेरे साथ जियेंगे तेरे साथ मरेंगे 
ये मंजूर है कि आज फिर से एक नई शुरुवात करेंगे 

तोड़ ले वो उन्हें जितना दम 
खामोश हैं, अभी नहीं कोई बात करेंगे 
हाँ बस इतना याद रखना कि तुझे याद रखेंगे 
ये मंजूर है कि आज फिर से एक नई शुरुवात करेंगे 

अच्छा है सबके रंग सामने आये तो आखिर 
कोई हो न हो अब कम से कम खुद तो खुद के साथ रहेंगे 
हमें रुलाने वाले बस इतना याद रखना खुदा तुझे रुला के रहेंगे 
हाँ ये मंजूर है इस दिल को कि फिर से एक नई शुरुवात करेंगे 

जमाना देखेगा कि किसमे कितना दम छुपा है 
पीछे से नहीं हम खुल के आगे से वार करेंगे 
ये भूल जाना कि हम तुम्हारे किये को भूल जायेंगे 
रोओगे तुम भी एक दिन जब तुम्हारी जिन्दगी में हम सैकड़ो काश पैदा करेंगे 
आज मंजूर है हमें कि फिर से एक नई शुरुवात करेंगे!!!
"दृढ संकल्प"

मैं इतनी आसानी से
टूट जाऊंगा 
ये तुमने सोचा भी कैसे 
मैं हवा की झोंको से टूट जाऊ 
वो पत्ता नहीं हूँ 
मैं तो पेड़ हूँ 
मेरे अन्दर अनगिनत पत्ते हैं 
और हैं न जाने कितने बीज भी 
जो पैदा कर सकते हैं मुझ जैसे कई पेड़ को 
अरे जाओ जाके 
किसी और को डराना
मैं जानता हूँ अच्छी तरह से 
कागज़ को जहाज़ बनाके उड़ाना
मैं इतनी आसानी से 
टूट जाऊंगा 
ये तुमने सोचा भी कैसे...?

Wednesday, May 11, 2011

"गौड: तुम बहुत खास हो"


तुम ऐसे ही हो 
और मुझे पता है सबकुछ तुम्हारे बारे में 
बड़ी परीक्षाएं लेते हो तुम 
जब कभी भी चाहते हो किसी को 
बहुत बड़ी उंचाई पे पहुचाना.

मुझे मालूम है कि
क्यूँ कर रहे हो 
तुम ये सबकुछ मेरे साथ 
क्यूँ दे रहे हो लगातार मुझे दुःख 
और देते ही जा रहे हो 
मुझे पता है 
अब तुम चाहने लगे हो 
मेरी उन्नति 
तुम चाहने लगे हो 
मुझे आकास की उंचाइयो में 
उड़ान भरते देखना 
तुम वाकई सुनते हो हर किसी की दुआ 
हाँ बस वक्त आने पर .

पहले मुझे ऐसा लगता था 
कि तुम कुछ ख़ास नहीं 
पर क्या मैं गलत था ?
नहीं बिलकुल भी नहीं 
मैं तो बिलकुल सही था 
तुम वाकई खास नहीं 
तुम बहुत खास हो 
और ये वही जान पायेगा 
जो करता होगा तुमसे बातें 
ढेर सारी बातें 
एकांत में .