Wednesday, May 6, 2015

(1.)

"हजार परेशानियां
साजिश करके
एक साथ लगी हैं
वर्षों से इसे थोड़ देने पे
पर ये अकेली
मेरी उम्मीद है कि
टूटती ही नहीं!"

(2.)

"हजार दुःख हैं
ऐसा नहीं
कि केवल खुश हूँ मैं
पर जब कभी हौले से भी
मेरे हौसले की हवा चलती है
सारे दुःख झर जाते हैं
पतझड़ के पत्तों की तरह!"

(3.)

"क़र्ज़?
हाँ हैं!
बहुत हैं.…
पर जितने भी हैं
ख्वाबों के तिनके में भी नहीं!"

(4.)

"मंजिल दूर है
पर
ख़ुशी इस बात की है
कि है
आगे इसी रस्ते पर!"

-शशिष@4.04pm


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