Saturday, May 2, 2015

"लोग पूछते हैं मुझसे
कि कौन है छुपा छुपा सा
मेरी कविताओं में
मेरी ग़ज़लों में
मेरी शायरिओं में
अब क्या कहूँ उनसे
कि एक कल्पना है छुपी हुई
हकीकत बनके
और एक हकीकत है छुपी हुई
कल्पना बनके!!!"

-शशिष@12.25am

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