"मेरे प्यार के कई मंज़र हैं
तुम्हारी आँखों में
मैंने देखा है,
ग़मों के भी,
कई समंदर हैं तुम्हारी आँखों में
तुम मुझसे भी नहीं बताते हो
राजे दिल कभी कभी
मैंने अपना आईना सा,
देखा है तुम्हारी आँखों में
तुम भी न जाने कितने
ख्वाब छुपा के बैठे हो
रात परेशान है,
कि नींद,
मिलती नहीं है तुम्हारी आँखों में
एक छोटा सा सवाल है
कहो तो कर लूँ प्रिय
क्या मेरा सच में
कोई घर है तुम्हारी आँखों में???"
-शशिष@1.16pm
तुम्हारी आँखों में
मैंने देखा है,
ग़मों के भी,
कई समंदर हैं तुम्हारी आँखों में
तुम मुझसे भी नहीं बताते हो
राजे दिल कभी कभी
मैंने अपना आईना सा,
देखा है तुम्हारी आँखों में
तुम भी न जाने कितने
ख्वाब छुपा के बैठे हो
रात परेशान है,
कि नींद,
मिलती नहीं है तुम्हारी आँखों में
एक छोटा सा सवाल है
कहो तो कर लूँ प्रिय
क्या मेरा सच में
कोई घर है तुम्हारी आँखों में???"
-शशिष@1.16pm
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