"जो तुमको देखा नहीं एक अरसे से
तो निगाहें अपना नूर खो बैठीं हैं
ये केवल दिल का कुसूर नहीं है प्रिय
मेरी तो रूह तक अपना सुकून खो बैठी है!"
-शशिष@9.43pm
तो निगाहें अपना नूर खो बैठीं हैं
ये केवल दिल का कुसूर नहीं है प्रिय
मेरी तो रूह तक अपना सुकून खो बैठी है!"
-शशिष@9.43pm
No comments:
Post a Comment