Monday, May 4, 2015

"तेरे आने से पहले तेरी आहट जान लेते हैं
शब के अंधेरे में भी तुझे हम पहचान लेते हैं

तू चाहे तो कभी आज़मा के देख ले हमको
तेरी उफ़ की खातिर हम अपनी जान देते हैं

सबकुछ पा कर भी जब सुकूं नहीं मिलता है हमें
तन्हाई में तेरी यादों की चादर हम तान लेते हैं

जब नभ में नहीं दिखता है हमें चाँद कभी
हम मेघ के आगोश में खोया उसे मान लेते हैं!

तेरे आने से पहले तेरी आहट जान लेते हैं....!"

-शशिष@2.49am

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