Saturday, May 2, 2015

सुनो प्रिय

"मुझे तुमसे
कुछ जरुरी बात कहनी है
सुनो प्रिय 
देखो जब कभी ऐसा लगे कि
मैं नाराज़ हूँ तुमसे
तो गुस्सा मत होना तुम
रूठ ना जाना तुम
याद रखना
मेरी नाराज़गी की उम्र
पल दो पल से
कभी अधिक नहीं होती
तुम्हारे लिए

तुम मनाओ या मनाओ
प्रिय मैं खुद मान जाऊँगा
मैं सबके जैसा नहीं हूँ
मैं ये नहीं सोचूंगा कि तुम झुको
बल्कि तुम्हारे झुकने से पहले
मैं खुद झुक जाऊंगा
प्रिय मैं खुद मान जाऊंगा

प्रिय मैं जब भी कहूँ कभी तुमसे
कि दूर चले जाओ मुझसे
तब तुम समझना प्रिय
मैं बिलकुल नहीं चाहता
एक पल को भी दूर होना तुमसे
उस पल कभी तुम
मत छोड़ना मुझे
प्रिय आगे मत बढ़ जाना
तन्हा छोड़ के मुझे

प्रिय मैं जब भी कहूँ कभी तुमसे
कि मैं जा रहा हूँ
अब नहीं मिलूंगा तुमसे
तो तुम चाहे तो पुकारना मुझे
या ना पुकारना मुझे
हां पर इंतज़ार जरूर करना
याद रखना
मैं अधिक देर तक
तुमसे दूर नहीं रह पाउँगा
रो लूंगा कहीं किसी तन्हाई में जीभर के
और कुछ लम्हों में ही
तुम्हारी बाहों में फिर लौट आऊंगा

बस चले मत जाना
ठहरे रहना
प्रिय मैं वक्त नहीं हूँ
कि एक बार चला जाऊं
तो लौट के ना आऊं

पर सुनो ना प्रिय
तुम इतना भी मेरे सब्र का
इन्तहां मत लिया करना
यूँ खामोश मत रहा करना
मेरी बातों का जवाब देना
हमेशा चुप मत रहा करना

बस तुम खामोश रहते हो
तो मुझे अच्छा नहीं लगता
प्रिय बात करते रहना
मुझे चुपके चुपके देखना जरूर
पर कभी नज़रें भी साथ करते करना

लेकिन इन सब के बावजूद
प्रिय मुझे जो तुमसे
सबसे बड़ी बात कहनी है
कि तुम जैसे भी हो
मुझे प्रिय हो
बहुत प्रिय हो
तुम ऐसे ही रहना
कभी बदलना मत
प्रिय कभी बदलना मत!!!"

-शशिष@3.48pm

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