Tuesday, May 5, 2015

"कई बातों का जवाब नहीं मिल पाता है
पास रह के प्यार का हिसाब नहीं मिल पाता है

जमीं से कह दो कि उसके बिन यहाँ
आसमां का कोई मिज़ाज नहीं मिल पाता है

अँधेरा जब फैलता है शहर के गलियारों में
ढूढ़ने से भी कोई आफ़ताब नहीं मिल पाता है

दरियाओं को समंदर पी के साफ़ कर देती है
नारे लगते हैं पर कोई इंकलाब नहीं मिल पाता है

अच्छा है प्यार मोहब्बत जवानी के लिए
बूढ़े शज़र को कोई ख़्वाब नहीं मिल पाता है

और गर जीना ही है तो मस्ती में जीया कर
यहाँ उदासियों को कोई इंसाफ नहीं मिल पाता है!"

-शशिष@3.16am

 

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