"कई बातों का जवाब नहीं मिल पाता है
पास रह के प्यार का हिसाब नहीं मिल पाता है
जमीं से कह दो कि उसके बिन यहाँ
आसमां का कोई मिज़ाज नहीं मिल पाता है
अँधेरा जब फैलता है शहर के गलियारों में
ढूढ़ने से भी कोई आफ़ताब नहीं मिल पाता है
दरियाओं को समंदर पी के साफ़ कर देती है
नारे लगते हैं पर कोई इंकलाब नहीं मिल पाता है
अच्छा है प्यार मोहब्बत जवानी के लिए
बूढ़े शज़र को कोई ख़्वाब नहीं मिल पाता है
और गर जीना ही है तो मस्ती में जीया कर
यहाँ उदासियों को कोई इंसाफ नहीं मिल पाता है!"
-शशिष@3.16am
पास रह के प्यार का हिसाब नहीं मिल पाता है
जमीं से कह दो कि उसके बिन यहाँ
आसमां का कोई मिज़ाज नहीं मिल पाता है
अँधेरा जब फैलता है शहर के गलियारों में
ढूढ़ने से भी कोई आफ़ताब नहीं मिल पाता है
दरियाओं को समंदर पी के साफ़ कर देती है
नारे लगते हैं पर कोई इंकलाब नहीं मिल पाता है
अच्छा है प्यार मोहब्बत जवानी के लिए
बूढ़े शज़र को कोई ख़्वाब नहीं मिल पाता है
और गर जीना ही है तो मस्ती में जीया कर
यहाँ उदासियों को कोई इंसाफ नहीं मिल पाता है!"
-शशिष@3.16am
No comments:
Post a Comment