"तुम नहीं जानते
तुम क्या हो मेरे लिए
और मुझे भी
बताना कहा आता है प्रिय
कई बार सोचा
कि तुम्हें क्या कहूँ
अपना दिल कहूँ
अपनी साँसें कहूँ
या कहूँ अपनी जिंदगी मैं
पर प्रिय ना जाने क्यों
सबकुछ कहने के बाद भी
कुछ कम सा लगता है
लगता है कुछ छूट गया
लगता है काश कि
कुछ और भी कह पाता मैं तुम्हें
पर नहीं हो पाता
प्रिय शब्दों में नहीं समेट पाता मैं तुम्हें
प्रिय तुम मेरे लिए
एक ऐसी अद्भुत भावना हो
जो शब्दों से परे है
जो बस मैं और मेरा दिल महसूस कर सकते हैं
एक अजीब सा खूबसूरत
ना जाने कहां से आया एहसास हो तुम
प्रिय तुम्हें कैसे बताऊँ मैं
मेरी जिंदगी में
सबसे अधिक ख़ास हो तुम
सबसे अधिक खास हो तुम!!!"
-शशिष कुमार तिवारी
(11.32am, 3rd May 2015, Delhi)

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