आज भी जब कभी
खिड़की से झांकता हूँ मैं
नीचे गेट पर और अगर
खुला होता है गेट
तो मुझे लगता है जैसे
वो तुम्हे बुला रहा है अपनी बाहें फैलाये
उसे शायद अब तक याद है
तुम्हारा आना
लेकिन शायद वो नहीं जानता कि
तुम कब का भूल गए हो
उस तक पहुचने का रास्ता
सोचता हूँ मैं उसे बता दूँ पर
मैं डरता हूँ
किसी के उम्मीद के टूटने से .
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