Tuesday, April 29, 2008

ये इश्क है मोहब्बत है

तुझे भुलने की हर कोशिश नाकाम होती है
आज भी तुझसे शुरू मेरी सुबह , तुझपे खत्म मेरी शाम होती है


शायद तुम भूल गए उन कसमों को उन वादों को 
अरे मोहब्बत में जीने वालो की मौत तक इम्तहाँ होती है


पहले दिखती है नई दुनिया हर तरफ़ खुशियों से भरी
फ़िर बाद में मोहब्बत की बेरुखी जिन्दगी भर साथ होती है


मुझे इस बात का गम नहीं कि आज तुम मेरे नहीं
तुमने गलत समझा मुझे गम येही हर पल मेरे साथ होती है


मुझे पता है तुम भी भूला नहीं पाओगे मुझको कभी
ये इश्क है मोहब्बत है इतनी बेजाँ नहीं होती है।

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