Friday, April 25, 2008

और मैं डरने लगा हूँ

कितनी मोहब्बत है तुमसे बता न सका
मैं आज भी दिल से तुम्हे भूला न सका


तेरी हर बात आज भी कैद है दिल में मेरे
इसी डर से किसी को अपना दिल दिखा न सका


न जाने क्या रही होगी मज़बूरी खुदा के साथ
वो मेरी मांगी एक चीज मुझे दिला न सका


वो सपने जो बिखर गए तेरे जाने के बाद
मैं आज तक उन्हें फ़िर से सजा न सका


और मैं डरने लगा हूँ मोहब्बत की आरजू से अब
पंख खुशियों के अब तक मुझमें कोई लगा न सका...

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