हमने समझा जिसे अपना अपना कहा था
था वो बस एक सपना जिसे एक न एक दिन टूटना था
सजाएँ सपने अपनी आँखों में हमने जिसके लिए
हमारी आँखों में वो चेहरा चुभेगा ऐसा सोचा कहा था
कितने नादान थे हम बड़ी आसानी से फंसाये गए
हमने सोचा हमें घर मिला पर घर जैसा उसमे कुछ नहीं था
जिसके मुस्कुराहटों पे थी अडी मुस्कुराहटें हमारी
यूं मार डालेंगे वे मेरी ख़ुशी को सोचा भी हो पर माना नहीं था
जिन्हें हम मानते थे खुद के लिए ईश्वर से बड़ा
वो इतने छोटे निकलेंगे कभी सोचा कहा था
रिश्तें ...कहने के लिए पर हमने तो दिल से बनाये थे
लेकिन दिल कम्बक्त को भी टूटना लिखा था
हमें तो अब भी विश्वास नहीं जो कुछ हुआ
लेकिन जो होना था उसे रोकने वाला कहा कोई था .
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