बस दो लाईनें---
"मेरी ही गलतियाँ अक्सर सिखाती हैं बहुत मुझको
कभी खामोश बैठू तो रुलाती हैं बहुत मुझको।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.12pm, 31st May at Hazaribag)
"मेरी ही गलतियाँ अक्सर सिखाती हैं बहुत मुझको
कभी खामोश बैठू तो रुलाती हैं बहुत मुझको।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.12pm, 31st May at Hazaribag)
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