Friday, May 24, 2013

थी ख्वाहिश नहीं उसकी
कि हम में कोई दूरी होगी
पता है मुझको, शायद
उसकी भी कुछ मज़बूरी होगी

उसने तो अपने दिल पे
लिखा था मेरा नाम बहुत
फिर अक्षर अक्षर काटा होगा
उठानी पड़ी बहुत पीड़ा होगी
पता है मुझको, शायद
उसकी भी कुछ मज़बूरी होगी

वो पूरी रात न सोया करती थी
जी भर के रोया करती थी
जिस दिन न देखे वो मुझको  
पल पल तडपा करती थी
अब न जाने वो हर पल में
मुझ बिन कितना मरती होगी
 थी ख्वाहिश नहीं उसकी
कि हम में कोई दूरी होगी
पता है मुझको, शायद
उसकी भी कुछ मज़बूरी होगी।

-शशिष कुमार तिवारी



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