Friday, May 31, 2013

हमें इश्क है तुमसे येही खता कर बैठे हैं
तुम लौट आओगे दिल को इत्ला कर बैठे हैं

अब देखते हैं कब तक जुदाई दूर करती है
तुम कितना चाहते हो और हम कितना प्यार करते हैं

कल जब हवाओं ने तुम्हारी खुशबूएं दे दीं
तभी से पुराने घर को बड़ा सजा के बैठे हैं

अब तो धडकनों में भी धड़कते रहते हो तुम हर पल
इसी को महसूस कर हम जिन्दगी में हर सांस भरते हैं

तुमसे शुरू तुम्हीं पे ख़तम होती जो कहानी है
दीवानगी में उस कहानी से हम नशा कर बैठे हैं ...

हमें इश्क है तुमसे येही खता कर बैठे हैं।

-शशिष कुमार तिवारी
(3.32pm, 31st May at Hazaribag)

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