हमें इश्क है तुमसे येही खता कर बैठे हैं
तुम लौट आओगे दिल को इत्ला कर बैठे हैं
अब देखते हैं कब तक जुदाई दूर करती है
तुम कितना चाहते हो और हम कितना प्यार करते हैं
कल जब हवाओं ने तुम्हारी खुशबूएं दे दीं
तभी से पुराने घर को बड़ा सजा के बैठे हैं
अब तो धडकनों में भी धड़कते रहते हो तुम हर पल
इसी को महसूस कर हम जिन्दगी में हर सांस भरते हैं
तुमसे शुरू तुम्हीं पे ख़तम होती जो कहानी है
दीवानगी में उस कहानी से हम नशा कर बैठे हैं ...
हमें इश्क है तुमसे येही खता कर बैठे हैं।
-शशिष कुमार तिवारी
(3.32pm, 31st May at Hazaribag)
तुम लौट आओगे दिल को इत्ला कर बैठे हैं
अब देखते हैं कब तक जुदाई दूर करती है
तुम कितना चाहते हो और हम कितना प्यार करते हैं
कल जब हवाओं ने तुम्हारी खुशबूएं दे दीं
तभी से पुराने घर को बड़ा सजा के बैठे हैं
अब तो धडकनों में भी धड़कते रहते हो तुम हर पल
इसी को महसूस कर हम जिन्दगी में हर सांस भरते हैं
तुमसे शुरू तुम्हीं पे ख़तम होती जो कहानी है
दीवानगी में उस कहानी से हम नशा कर बैठे हैं ...
हमें इश्क है तुमसे येही खता कर बैठे हैं।
-शशिष कुमार तिवारी
(3.32pm, 31st May at Hazaribag)
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