Monday, April 14, 2014

बस दो पंक्तियाँ---

"सारी रात जब तन्हाइयों को लिखा मैंने,
महफ़िलें वाह वाह कहके झूमने लगीं!"

-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 5.29am, Kota)

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