बस दो पंक्तियाँ---
"सारी रात जब तन्हाइयों को लिखा मैंने,
महफ़िलें वाह वाह कहके झूमने लगीं!"
-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 5.29am, Kota)
"सारी रात जब तन्हाइयों को लिखा मैंने,
महफ़िलें वाह वाह कहके झूमने लगीं!"
-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 5.29am, Kota)
No comments:
Post a Comment