"दिल में आती है जो वही बात करते हैं
इस तरह हम रोज कई करामात करते हैं
लोग क्या सोचेंगे हमें देख कर आखिर
ऐसे सवाल अक्सर हमपे आघात करते हैं
तोड़ के बंदिशों को उनसे मिलने की जिद में
रोज कई मुश्किलों से हम मुलाकात करते हैं
डरते नहीं हैं इश्क़े जहां में रहने वाले
अपनी दीवानगी से वो खुदा को साथ करते हैं
कौन चाहता है अश्कों को जुदा करना यहाँ
ये खेल तो सारे दिल के ज़ज्बात करते हैं
दिल में आती है जो वही बात करते हैं..... "
-शशिष कुमार तिवारी
(15th April 2014, 11.44am, Kota)
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