"क्या आप जानते हैं कि वो कौन सी एक चीज है जो हम सबका इंतज़ार कर रही है....? हाँ ! आप जानते हैं....'मौत'! जी हाँ! मौत हम सबका इतंज़ार कर रही है और उसे पता है कि हम रास्ते में हैं! लेकिन उससे बड़ी बात ये है कि क्या हमें पता है कि हम रास्ते में हैं?!? अगर पता है और एहसास भी है तो फिर हम अपना वक्त क्यों बर्बाद कर रहें हैं? क्यों हम किसी अनुकूल स्तिथि का इंतज़ार कर रहें हैं? हमें चाहिए कि हम अपनी मेहनत और ईमानदारी से मौजूदा परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनायें। किसी अच्छे वक्त के इंतज़ार में रुकने से कहीं बेहतर है कि हम बुरे वक्त में भी मुस्कुरा कर आगे बढ़ते रहें। आगे बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है! जब आप एक बड़े उद्देश्य का पीछा करते हैं तो निःसंदेह हज़ार नकारात्मक चीजें आपका पीछा करती हैं, अगर आपकी गति तेज है तो ये नकारात्मक चीजें कभी आपको पकड़ नहीं पायेंगी, थक जायेंगी और हार मान लेंगी! लेकिन अगर आप रुके तो शायद ये नकारात्मक शक्तियां आपकी सोच को पकड़ कर ऐसी खाई में डाल देंगी जहाँ से अगर सोच लौट भी आये तो वो कम से कम चोटिल जरूर होगी! आपकी सोच ही आपकी रफ़्तार तय करती है; आपकी सोच ही आपको आपके मंजिल तक लेके जाती है! इससे पहले कि आपकी नकारात्मक सोच आपको बदल दे, आगे बढिए, डरना छोड़िये, अपने आप पर शक करना बंद कीजिये और इंतज़ार करना छोड़ के कुछ ऐसा कीजिये कि पूरी दुनिया आपका इंतज़ार करे!"
"एक एक पल
एक एक दिन
हाथ की मुट्ठी में से
रेत की तरह निकलते जाता है
फिसलते जाता है
और हम ताउम्र
मुट्ठी बांध कर कुछ यूँ खड़े रहते हैं
कि जैसे सारा खजाना
अटका हो हमारी मुट्ठी में!"
-शशिष
"एक एक पल
एक एक दिन
हाथ की मुट्ठी में से
रेत की तरह निकलते जाता है
फिसलते जाता है
और हम ताउम्र
मुट्ठी बांध कर कुछ यूँ खड़े रहते हैं
कि जैसे सारा खजाना
अटका हो हमारी मुट्ठी में!"
-शशिष
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