Friday, June 21, 2013

"लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे" 

ना मंजूर तो ना सही 
हम लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे 
आँधियों तुम हार जाओगे 
हम गिर के उठ जाना नहीं छोड़ेंगे 

हमने ख़्वाब देखें हैं 
तो ख़्वाबों के साथ जियेंगे 
मुश्किलों हम दूभ हैं 
कट जाने के बाद भी उग जाना नहीं छोड़ेंगे 
ना मंजूर तो ना सही 
हम लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे 

उन्हें हक़ है 
वो तोड़ दें रिश्ता 
बंद कर दें दरवाजे घर के 
पर अपनी भी फितरत है ये 
अश्क बन आँखों में आना नहीं छोड़ेंगे 
ना मंजूर तो ना सही 
हम लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे 

जितनी कोशिश करले किश्मत 
हमें रोक लेने की 
हम दरिया हैं 
सबको चीरते हुए बह जाना नहीं छोड़ेंगे 
लाख बड़ी क्यूँ न हों मजहबी दीवारें 
हम दिलों को दिलों से मिलाना नहीं छोड़ेंगे 
ना मंजूर तो ना सही 
हम लौ जलाना नहीं छोड़ेंगे!

-शशिष कुमार तिवारी
(1.38am, 21st June at Patna) 

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