"हां मैं जनता हूँ
कि तुम पढ़ते रहते हो
चोरी चुपके
मेरी कवितायेँ
और ये भी जनता हूँ
कि तुम मेरी फ़िक्र करते हो
और भी बहुत कुछ
मैं जनता हूँ
जो तुम करते हो
पर बताते नहीं
जताते नहीं
और इसीलिए तो
मैं भी बेफिक्र
लिखता रहता हूँ
अपने दिल की बात
क्योकिं मैं जनता हूँ
मेरी बातें मेरी मंजिल तक
पहुँच ही जाती हैं!!!"
-शशिष कुमार तिवारी
कि तुम पढ़ते रहते हो
चोरी चुपके
मेरी कवितायेँ
और ये भी जनता हूँ
कि तुम मेरी फ़िक्र करते हो
और भी बहुत कुछ
मैं जनता हूँ
जो तुम करते हो
पर बताते नहीं
जताते नहीं
और इसीलिए तो
मैं भी बेफिक्र
लिखता रहता हूँ
अपने दिल की बात
क्योकिं मैं जनता हूँ
मेरी बातें मेरी मंजिल तक
पहुँच ही जाती हैं!!!"
-शशिष कुमार तिवारी
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