तुम ऐसे ही हो
और मुझे पता है सबकुछ तुम्हारे बारे में
बड़ी परीक्षाएं लेते हो तुम
जब कभी भी चाहते हो किसी को
बहुत बड़ी उंचाई पे पहुचाना.
मुझे मालूम है कि
क्यूँ कर रहे हो
तुम ये सबकुछ मेरे साथ
क्यूँ दे रहे हो लगातार मुझे दुःख
और देते ही जा रहे हो
मुझे पता है
अब तुम चाहने लगे हो
मेरी उन्नति
तुम चाहने लगे हो
मुझे आकास की उंचाइयो में
उड़ान भरते देखना
तुम वाकई सुनते हो हर किसी की दुआ
हाँ बस वक्त आने पर .
पहले मुझे ऐसा लगता था
कि तुम कुछ ख़ास नहीं
पर क्या मैं गलत था ?
नहीं बिलकुल भी नहीं
मैं तो बिलकुल सही था
तुम वाकई खास नहीं
तुम बहुत खास हो
और ये वही जान पायेगा
जो करता होगा तुमसे बातें
ढेर सारी बातें
एकांत में .
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